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भारतीय वन्यजीवों की दुर्दशा: ये आंकड़े और क्या कहते हैं?

शौर्ज्य भौमिक | Updated on: 10 February 2017, 1:50 IST
QUICK PILL
  • काजीरंगा टाइगर रिजर्व में 2012 से अप्रैल 2015 के बीच 74 गैंडे मारे गए. इसी बीच करीब 39 शिकारियों को मारा गया जबकि 154 शिकारी गिरफ्तार किए गए.
  • पोचिंगफैक्ट्स डॉटकॉम के आंकड़ों के मुताबिक दवा और स्वास्थ्य टॉनिक को बनाने में बाघों के हड्डियों की मांग में बढ़ोतरी हुई है. पिछले कुछ सालों में बाघों की हड्डी से बने वाइन की मांग में बढ़ोतरी हुई है.

74
गैंडे

मुनाफा. यह शब्द नव-उदारीकरण के युग में रह रहे सभी लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा है. मुनाफा अधिक से अधिक बढ़ाने के लिए हम तबाही की तरफ जा रहे हैं. हम यह काम जंगलों को काटकर और जानवरों को मारकर किया जा रहा है.

5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया और इसी दिन जन दिवस भी मनाया गया. वैसा दिन जब आप अपनी धरती माता को याद करने के लिए कुछ करते हैं. लेकिन हम दूसरे ही दिन पर्यावरण का विनाश करने पहुंच जाते हैं. विश्व पर्यावरण दिवस 2016 की थीम लाइन थी, 'गो वाइल्ड फॉर लाइफ.' यह वन्य जीवन में अवैध व्यापार पर केंद्रित था. इन आंकड़ों से भारत में वन्यजीवन की दुर्दशा के बारे में पता लग सकता है.

74

काजीरंगा टाइगर रिजर्व में 2012 से अप्रैल 2015 के बीच गैंडे मारे गए.

इसी बीच करीब 39 शिकारियों को मारा गया जबकि 154 शिकारी गिरफ्तार किए गए.

ह्यूमेन सोसाएटी इंटरनेशनल के मुताबिक, 'गैंडे के शारीरिक अंगों का इस्तेमाल चीन, वियतनाम और पूर्वी एशिया के अन्य देशों में प्रमुखता से होता है. हर साल इसके लिए सैंकड़ों गैंडे का शिकार किया जाता है.'

100,000
अमेरिकी

डॉलर

वियतनाम में गैंडे के सींग की प्रति किलो कीमत है.

वियतनाम में गैंडे के सींग की कीमत सोने से अधिक है.

2,226

2014 में भारत में बाघों की संख्या थी.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में पूरी दुनिया के बाघों की 70 फीसदी आबादी है.

भारत के 2.06 फीसदी इलाकों करीब 47 टाइगर रिजर्व हैं. यह 18 इलाकों में फैला हुआ है.

20
फीसदी

2014 में अवैध शिकार से हुए बाघों की मौत.

2005 से मार्च 2016 के बीच करीब 347 बाघ मारे गए.

पोचिंगफैक्ट्स डॉटकॉम के आंकड़ों के मुताबिक दवा और स्वास्थ्य टॉनिक को बनाने में बाघों के हड्डियों की मांग में बढ़ोतरी हुई है. पिछले कुछ सालों में बाघों की हड्डी से बने वाइन की मांग में बढ़ोतरी हुई है.

चीन की पारंपरिक दवा पद्धति में बाघों के पेनिस को मर्दानी ताकत बढ़ाने का औजार माना जाता है. 2006 में बाघ के पेनिस से बने एक व्यंजन को बेचा गया जिसकी कीमत 5,700 डॉलर थी.

4

मुख्य कदम जो बाघों के अवैध शिकार को रोकने के लिए सरकार की तरफ से उठाए गए.

वन्यजीवन के खिलाफ संगठित अपराध को रोकने के लिए वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो राज्यों की मदद करेगी.

  • स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्र्स को 100 फीसदी केंद्रीय फंडिंग दी जाएगी.
  • कानूनी कार्रवाई के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे.
  • कर्मचारियों को हथियारों से प्रबंधित किया जाएगा.
सबसे अहम सवाल. क्यों अवैध वन्यजीवों का कारोबार समस्या है?जवाब साधारण है. वन्यजीवों के अवैध कारोबार से प्रकृति को नुकसान होता है. आखिरकार इससे आजीविका पर असर होता है. वन्यजीवों के अवैध कारोबार का मतलब केवल बाघ और गैंडे से नहीं होता है. इसमें कई अन्य वैसे संवेदनशील जानवर भी शामिल हैं, जो विलुप्त होने की कगार पर है.

First published: 7 June 2016, 4:59 IST
 
शौर्ज्य भौमिक @sourjyabhowmick

संवाददाता, कैच न्यूज़, डेटा माइनिंग से प्यार. हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियास्पेंड में काम कर चुके हैं.

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