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समाजवादी कुनबे को भेदने के लिए बीजेपी के तीन बाण

सुहास मुंशी | Updated on: 29 October 2016, 8:18 IST
QUICK PILL
  • उत्तर प्रदेश में संकट के दौर से गुज़र रही समाजवादी पार्टी की हालत को भाजपा एक सुनहरे मौक़े के रूप में देख रही है.
  • भाजपा सूत्रों के मुताबिक पिछले एक हफ्ते में जैसे-जैसे समाजवादी पार्टी की परेशानी बढ़ी है, भगवा पार्टी ने उप्र में अपने अभियान की रफ़्तार उतनी ही तेज़ कर दी है. 

सपा की दुनिया अंधकारमय होते देख उत्तर प्रदेश भाजपा तीन नई तरक़ीबों के साथ आई है. पार्टी अब मोदी और शाह का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करना चाहती है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सैन्य परिवारों के बीच सर्जिकल स्ट्राइक की मार्केटिंग और अन्य पार्टियों ख़ासकर सपा के गढ़ में अधिक से अधिक रैलियां का आयोजन करना. पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने गुरुवार को इटावा में जो रैली की, वह चुनाव अभियान का एक नया चरण था. रायबरैली, अमेठी, कन्नौज में भी और ज्यादा रैलियां करने की योजना है. कोई भी अंदाज़ा लगा सकता है कि पार्टी का चुनाव अभियान दूसरे गियर में आ गया है.

अन्य दलों के गढ़ों पर हमलावर

ऐसे समय में, जब सत्तारूढ़ दल के जमीनी कार्यकर्ता, मंत्री, विधायक और नेता लखनऊ में लड़ाई में अपना वक्त खपा रहे हैं, ऐसे समय में अमित शाह ने सपा और उसके मुखिया मुलायम सिंह के गढ़ इटावा में हुंकार भरी है, उनके घर में सेंध लगा दी है और उप्र पर भी अपनी बाजी लगा दी है. 

इटावा में शाह की रैली पहले से तय नहीं थी. पार्टी सूत्रों के मुताबिक सपा के मजबूत इलाके में सिर्फ एक या दो दिन पहले 'संकल्प रैली' किए जाने का फ़ैसला लिया गया था. अमित शाह 25 अक्टूबर को गुजरात पहुंच गए थे. उन्हें दिवाली तक यहां रहना था और यहां रहकर अगले साल राज्यों में होने वाले चुनाव की तैयारियों पर पार्टी नेताओं से चर्चा करना, उनके साथ मुलाकात करना शामिल था.

मगर संघर्ष और झगड़ों की खबरों के बीच अखिलेश और शिवपाल खुलेआम एक-दूसरे पर आरोप लगाने लगे. मुलायम सिंह ने शिवपाल के साथ संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस की. शिवपाल ने खुद 'लोहियावादी पार्टियों' से चुनाव के पहले संपर्क साधा. सपा पर हमला करने का यही मौका था.

अपनी रैली में अमित शाह ने शहीदों की स्मृतियों को ताजा करने, सेना के शौर्य की प्रशंसा करने, सपा की गुंडागर्दी और बसपा के भ्रष्टाचार के अलावा कुछ नया नहीं कहा है. दिलचस्प तो यह है कि उन्होंने नरेन्द्र मोदी को अन्य तीन दलों के सीएम उम्मीदवारों, कांग्रेस की शीला दीक्षित, सपा के अखिलेश यादव और बसपा की मायावती के खिलाफ ला खड़ा किया. 

इससे शाह ने इस बात की पुष्टि कर दी जो भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने तीन दिन पहले कही थी. मौर्य ने कहा था कि पार्टी उप्र चुनाव में किसी को सीएम का चेहरा बनाकर पेश नहीं करेगी. 

इटावा में रैली का आयोजन करने वाले भाजपा सूत्रों के अनुसार शाह ने काफी दूर तक विचार किया है और कार्यकर्ताओं से इटावा के आसपास के इलाक़ों जैसे बरथना, जसवंतनगर, औरेया, दिबियापुर, विधुना, सिकन्दरा, मैनपुरी, करहल और सिरसागंज में जाकर कड़ी मेहनत करने और पार्टी के कार्यक्रमों को जनता तक पहुंचाने को कहा है. इन सभी क्षेत्रों में सिकन्दरा को छोड़कर सभी जगह सपा के विधायक हैं. सिकन्दरा सीट बसपा के पास है.

उप्र के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने कहा है कि इटावा में ही हमारा हमला खत्म नहीं हो जाएगा. हमारे लिए अन्य दलों को भी चुनौती देना उतना ही महत्वपूर्ण है. हमारी नेता अमेठी में नियमित रूप से अभियान में जुटी हुईं हैं और अन्य कई नेता कन्नौज में रैली निकालने में व्यस्त हैं. हम परिवर्तन यात्राओं के जरिए भी अन्य दलों पर हमला करेंगे. (भाजपा का बड़ा चुनावी अभियान 5 नवम्बर से शुरू हो रहा है).

सैन्य परिवारों तक पहुंच

सूत्रों के अनुसार पार्टी ने पहले से ही उप्र में रहने वाले सैनिकों के परिवार तक पहुंच बनाना शुरू कर दिया है. सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर सेना के शौर्य की प्रशंसा की जा रही है. पश्चिमी उप्र में सैन्य परिवारों की संख्या काफी अधिक है. हम उन तक अपनी पहुंच बना रहे हैं. सैनिकों और पूर्व सैनिकों के परिवार सर्जिकल स्ट्राइक से काफी उत्साहित हैं. 

पार्टी कार्यकर्ता ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से अपील की है कि वे इस दिवाली पर सैनिकों के परिवारों को शुभकामना संदेश भेजें. अमित शाह ने भी इटावा की रैली में कहा है कि दिवाली पर शहीदों की यादमें एक दिया जरूर जलाया जाए. सूत्रों के अनुसार इसी थीम पर शहीदों की याद में और भी कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है. मार्च और रैलियां तो निकाली ही जाएंगी.

मोदी और शाह की और अधिक रैलियां

भाजपा नेतृत्व जब उप्र में परिवर्तन यात्रा निकालने की योजना बना रहा था, तब वह इस विचार का था कि प्रधानमंत्री मोदी की ज्यादा रैलियां न निकाली जाएं, जैसा कि पार्टी ने बिहार में किया था. शाह से उम्मीद थी कि वे सिर्फ एक बड़ी रैली करेंगे जबकि मोदी को रैली को समापन दिवस पर संबोधित करना था. परिवर्तन यात्रा का समापन 25 दिसम्बर को लखनऊ में होना है. 

आधिकारिक लाइन जो पार्टी कार्यकर्ताओं ने ली थी, वह यह थी कि उस समय प्रधानमंत्री काफी व्यस्त रहेंगे. पर लगता है कि पिछले कुछ दिनों में इसमें कुछ तब्दीली कर दी गई है. शाह उप्र में न केवल कम से कम आधा दर्जन रैलियों को सम्बोधित करेंगे बल्कि मोदी के खुद पांच से छह रैलियां करने का कार्यक्रम बनाया जा रहा है. लखनऊ के ऐशबाग मैदान में संबोधन के बाद उन्होंने महोबा में रैली की है. एक अन्य रैली मुरादाबाद में दो दिसम्बर को होने वाली है. 

First published: 29 October 2016, 8:18 IST
 
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