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एसआरपी कल्लूरी: माओ और जेएनयू को नहीं जानते बस्तर के आदिवासी

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 May 2017, 12:01 IST
SPR Kalluri

छत्तीसगढ़ के विवादास्पद पुलिस अधिकारी एसआरपी कल्लूरी नई दिल्ली के पत्रकारिता संस्थान आईआईएमसी में नक्सलवाद पर भाषण देने पहुंचे.

एसआरपी कल्लूरी ने भाषण में कहा कि बस्तर के 40 लाख लोगों का मुझे समर्थन है. विरोध सिर्फ पांच लोग करते हैं. उनके विरोध का कारण पूरी तरह से निजी है.

कल्लूरी ने कहा कि नक्सलवाद की समस्या को लेकर बस्तर, रायपुर और दिल्ली में अलग-अलग तरह की धारणा है. ठीक उसी तरह जैसे रायपुर में जेएनयू को लेकर है. दोनों ही जगह सच्चाई और धारणा में अंतर है. इसी धारणा को तोड़ने के लिए दिल्ली आया हूं.

उन्होंने कहा कि जिसे भी बस्तर को समझना है, उसे बस्तर आना होगा. यहां दिल्ली में बैठकर नक्सवाद को नहीं समझा जा सकता है.

हालांकि कल्लूरी ने इसके साथ यह भी स्वीकार किया कि बस्तर के आदिवासी नक्सलियों और पुलिस के बीच पिस रहे हैं.

उन्होंने कहा कि बस्तर का आदिवासी क्रांति, माओ और जेएनयू को नहीं जानता है. नक्सली कहते हैं कि क्रांति गरीब के भूखे पेट से निकलती है, जबकि मैं कहता हूं कि बस्तर का आदिवासी भूखा ही नहीं है, फिर वह किस क्रांति में भाग लेगा.

कल्लूरी ने कहा है कि नक्सलवाद उस अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा है, जिसमें भारत को सुपर पावर बनने से रोका जा रहा है. नक्सली 1100 करोड़ की वसूली करते हैं, जिसे इन लोगों के शहरी नेटवर्क में बांटा जाता है. मेरा विरोध वही करते हैं, जो इस धंधे में फंसे हुए हैं.

कल्लूरी ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा कि जब मैं यहां आने की तैयारी कर रहा था तब लोगों ने कहा कि आईआईएमसी मत जाओ, लोग जूता मारेंगे, लेकिन आप लोगों को देखने के बाद मेरा डर खत्म हो गया.

उन्होंने कहा कि दिल्ली में धारणा है कि कल्लूरी मतलब छह फीट का आदमी, जिसके दस हाथ-पैर हैं. मैं इसी धारणा को बदलने आया हूं. मेरी पत्नी ने कहा कि तबादले के बाद भी नक्सल पर चर्चा करने क्यों जा रहे हो, तो मैंने कहा तबादले से इलाका बदलता है, इरादा नहीं.

First published: 21 May 2017, 9:53 IST
 
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