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श्रीश्री रविशंकर: नोबेल पुरस्कार के लायक नहीं मलाला

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST

आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर ने विवादित बयान दिया है. रविशंकर का कहना है कि पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई नोबेल पुरस्‍कार के लायक नहीं है.

श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि उस लड़की ने कुछ भी नहीं किया. दरअसल उनसे पूछा गया था कि मलाला को पुरस्‍कार मिला तो क्‍या गलत था?

रविशंकर ने कहा कि वो काम करने में विश्‍वास करते हैं न कि सम्‍मान में. रविशंकर ने ये बयान महाराष्‍ट्र के सूखा पीडि़त लातूर जिले में दिया था. वहां पर वे सूखा राहत काम का जायजा लेने गए थे. 

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वहां श्रीश्री रविशंकर से पूछा गया था कि क्‍या आप यह काम नोबेल पुरस्‍कार के लिए कर रहे हैं. इस पर उन्‍होंने जवाब दिया, बिल्‍कुल नहीं. मैं एक पुरस्‍कार से क्‍या करूंगा. हम सालों से सामाजिक काम कर रहे हैं और यह पुरस्‍कारों के लिए नहीं है.

'मलाला को बिना कुछ किए नोबेल'


जब एक 16 साल की लड़की को बिना कुछ किए पुरस्‍कार मिल जाता है, तो आपको शांति पुरस्‍कार पाने के लिए कुछ करने की जरूरत नहीं. इसके पीछे राजनीतिक कारण भी काम करते हैं. 

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इससे पहले एक अंग्रेजी अखबार ने रिपोर्ट दी थी कि श्रीश्री रविशंकर ने कहा था कि उन्‍हें नोबेल पुरस्‍कार ऑफर किया गया था लेकिन उन्‍होंने मना कर दिया था.

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अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट का खंडन


वहीं आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से बयान जारी कर इस रिपोर्ट का खंडन किया गया है. आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से कहा गया है कि अंग्रेजी अखबार के रिपोर्टर ने रविशंकर के बयान की गलत व्याख्या की है. आर्ट ऑफ लिविंग ने उम्मीद जताई है कि मीडिया इस गलती में सुधार कर लेगा.

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बचपन बचाओ आंदोलन के अगुवा कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान में तालिबान के हमले में घायल होने के बाद सुर्खियों में रही मलाला यूसुफजई को 2014 में संयुक्त रूप से शांति का नोबेल पुरस्कार मिला था.

मलाला का नाम सबसे कम उम्र की नोबेल पुरस्कार विजेता के रूप में दर्ज है. वहीं कैलाश सत्यार्थी भारत में जन्मे पहले ऐसे शख्स हैं, जिन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार मिला है.

First published: 3 May 2016, 9:15 IST
 
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