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ब्रम्हांड का रहस्य बताने वाले वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग की अधूरी रह गयी ये आखिरी ख्वाहिश

आकांक्षा अवस्थी | Updated on: 14 March 2018, 12:52 IST

21 साल की उम्र में लाइलाज बीमारी झेल रहे स्टीफन हॉकिंग ने कभी भी इस बीमारी से हार नहीं मानी. ब्रम्हांड के रहस्यों से पर्दा उठाने वाले स्टीफन ने कई सालों तक व्हील चेयर पर संघर्ष किया. स्टीफन हॉकिंग जब 21 साल के थे तब पता चला था कि उनको मोटर न्यूरॉन नाम की बीमारी है और अब वे कुछ महीने ही जिंदा रह पायेंगे.

इस बीमारी में शरीर की नसों पर लगातार हमला होता है और शरीर के अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं और व्यक्ति चल-फिर पाने की स्थिति में भी नहीं रह जाता है. इस बीमारी का ही एक रूप है एएलएस (Amyotrophic Lateral Sclerosis).

 

हॉकिंग को धीरे-धीरे चलने-फिरने में समस्या होने लगी और उनकी आवाज भी लड़खड़ाने लगी. इस बीमारी के कारण शरीर के सारे अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते है और अंत में मरीज की मौत हो जाती है. उस समय डॉक्टरों ने कहा कि स्टीफन हॉकिंग दो वर्ष से अधिक नहीं जी पाएंगे और जल्द ही उनकी मौत हो जायेगी.

इस बीमारी की वजह से धीरे-धीरे उनके शरीर ने काम करना बंद कर दिया. लेकिन उन्होंने विकलांगता को अपने ऊपर हावी होने नहीं दिया. उन्होंने अपने शोध कार्य और सामान्य जिंदगी को रुकने नहीं दिया.

गणित पढ़ना चाहते थे स्टीफन
वे गणित पढ़ना चाहते थे, लेकिन ऑक्सफोर्ड में मैथ न होने से फिजिक्स पढ़ना पड़ा. शुरू में वे अपनी कक्षा में औसत से कम अंक पाने वाले छात्र थे, उन्हें बोर्ड गेम खेलना अच्छा लगता था. स्टीफन को गणित में बहुत दिलचस्पी थी, यहां तक कि उन्होंने गणितीय समीकरणों को हल करने के लिए कुछ लोगों की मदद से पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के हिस्सों से कंप्यूटर बना दिया था.

मोटर न्यू्रॉन बीमारी क्या है
स्टीफन हॉकिंग जब 21 साल के थे तब पता चला था कि उनको मोटर न्यूरॉन नाम की बीमारी है और अब वे कुछ महीने ही जिंदा रह पायेंगे. इस बीमारी में शरीर की नसों पर लगातार हमला होता है और शरीर के अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं और व्यक्ति चल-फिर पाने की स्थिति में भी नहीं रह जाता है. इस बीमारी का ही एक रूप है एएलएस (Amyotrophic Lateral Sclerosis).

ऑक्सफोर्ड में पढाई के दौरान ही अपने अंतिम वर्ष के दौरान हॉकिंग अक्षमता के शिकार होने लगे. उन्हें सीढ़ियां चढ़ने में दिक्कत होने लगी. धीरे-धीरे यह समस्याएं इतनी बढ़ गयी कि उनकी बोली लड़खड़ाने लगी. उस समय, डॉक्टरों ने कहा कि स्टीफन हॉकिंग दो वर्ष से अधिक नहीं जी पाएंगे और उनकी जल्द ही मृत्यु हो जाएगी.

अपनी बीमारी को लेकर उन्होंने कहा था, “मेरी बिमारी का पता चलने से पहले, मैं जीवन से बहुत ऊब गया था. ऐसा लग रहा था कि कुछ भी करने लायक नहीं रह गया है.”

 

एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “21 की उम्र में मेरी सारी उम्मीदें शून्य हो गयी थीं और उसके बाद जो पाया वह बोनस है. हालांकि मैं चल नहीं सकता और कंप्यूटर के माध्यम से बात करनी पड़ती है, लेकिन अपने दिमाग से मैं आज़ाद हूँ“

अंतरिक्ष में जाना था सपना
ब्रम्हांड के कई राज़ खोलने वाले वैज्ञानिक स्टीफेन को अंतरिक्ष के प्रति विशेष लगाव था. अंतरिक्ष जाना उनका सपना था. यहां तक कि उनका कहना था कि वे अंतरिक्ष में जाना चाहते है और उन्हें ख़ुशी होगी कि भले ही उनकी अंतरिक्ष में मृत्यु हो जाए.

First published: 14 March 2018, 12:52 IST
 
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