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तांगेवाला आसुमल ऐसे बना आसाराम

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 April 2018, 12:18 IST

नाबालिग से रेप के आरोप में आसाराम को जोधपुर की अदालत ने दोषी करार दिया है. इस मामले में पीड़ित नाबालिग के पिता ने कहा ''आसाराम को दोषी ठहराया गया है, हमें न्याय मिला है. मैं उन सभी को धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने इस लड़ाई में हमें समर्थन दिया. अब मुझे आशा है कि उसे सख्त सजा मिलेगी. मैं यह भी उम्मीद करता हूं कि जिन गवाहों की हत्या या अपहरण किया गया उन्हें भी न्याय मिले.

बलात्कार के आरोप में जेल में बंद आसाराम की कहानी बड़ी दिलचस्प है. खुद को आध्यात्मिक गुरु के रूप में स्थापित करने से पहले आसाराम का नाम आसुमल था और वह एक 'तंगावाला' था. आसाराम अजमेर रेलवे स्टेशन से दरगाह शरीफ तक तीर्थयात्रियों को ले जाता था.

अजमेर तांगा यूनियन के सदस्य पन्ना उस्ताद कहते हैं, एक गॉडमैन के रूप में लोकप्रिय होने के बाद उनको जानने वाले कई लोग आश्चर्यचकित थे.

सात साल की उम्र में आसुमल पाकिस्तान के सिंध से भारत पहुंचा था. शुरुआत में 1963 में एक रिश्तेदार से निमंत्रण पर आसुमल अजमेर एक रिश्तेदार के यहां आ गया जबकि उसका परिवार गुजरात में रहा था. वरिष्ठ वकील चरणजीत सिंह ओबेरॉय के मुताबिक आसुमल के पिता अजमेर चले गए और अपने परिवार के साथ खारी कुई में रहने लगे.

आसुमल कड़ी मेहनत कर रहा था और विभाजन के बाद गरीबी का सामना करने वाले परिवारों की मदद के लिए पैसे कमाना चाहता था. वह खारी कुई में तांगा चलाकर अक्सर तीर्थयात्रियों को ले जाता था. तांगा चलाने के अलावा कुछ वक्त चाय भी बेची. आसाराम तब अपने चाचा के साथ अजमेर के शीशा खान इलाके में किराए के मकान में रहता था.

पैसे की चाहत ने कुछ दिन बाद वह राजस्थान से गुजरात के भरुच चला गया. जहां वो आध्यात्मिक गुरु लीलाशाह से जुड़ा, उनसे दीक्षा ली. इसी के बाद वह आसुमल से आसाराम हो गया. साल 1972 में आसाराम ने अहमदाबाद से लगभग 10 किलोमीटर दूर मुटेरा कस्बे अपना पहला आश्रम शुरू किया. फिर साम्राज्य बढ़ा, आज देश में आसाराम के आश्रमों की संख्या 400 तक पहुंच गए. इतना बड़ा है रेपिस्ट आसाराम का साम्राज्य, 400 आश्रम और 2000 करोड़ की है संपत्ति

First published: 25 April 2018, 12:18 IST
 
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