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करगिल के 17 साल: गुड़िया का मिलना, फिर बिछड़ना और चले जाना

पत्रिका ब्यूरो | Updated on: 26 July 2016, 12:06 IST
(पत्रिका)

1999 में मेरठ की गुड़िया की शादी आरिफ नाम के फौजी के साथ हुई थी, लेकिन शादी के दस दिन के अन्दर ही करगिल युद्ध छिडने के कारण आरिफ़ को सीमा पर जाना पड़ा. 

कारगिल युद्ध के दौरान आरिफ अचानक मस्कोह सेक्टर से लापता हो गया. भारतीय सेना ने पहले उसके लापता होने की बात कही और फिर उसे भगोड़ा करार दे दिया. पति के साथ बिताये 10 दिनों की यादों के सहारे गुड़िया ने चार साल तक अपने पति का इंतजार किया लेकिन वो नहीं लौटा. 

आरिफ की मौत को सच मानकर 2003 में ​गुड़िया की शादी दूर के रिश्तेदार तौफीक नाम के युवक से करा दी गई. कुछ दिनों बाद गुड़िया गर्भवती हो गई.

इस कहानी में नया मोड़ तब आया, जब आरिफ के लापता होने के करीब पांच साल बाद सेना ने जानकारी दी कि आरिफ जिंदा है और पाकिस्तान की जेल में बंद हैं.

इसके बाद आरिफ को पाकिस्तान की जेल से रिहा कर दिया गया. लेकिन आरिफ के वतन वापस आने पर उसे पता चला कि उसकी दुनिया उजड़ चुकी है, जिस गुड़िया को वह छोड़ कर गया था, उसने तौफीक से विवाह कर लिया है.

आरिफ का वतन वापसी पर मेरठ स्थित उसके गांव मुंडाली में जोरदार स्वागत किया गया. आरिफ के आने की खबर सुनकर गुड़िया भी परिवार के साथ दिल्ली से मुंडाली पहुंची.

गुड़िया आरिफ के साथ दोबारा नहीं रहना चाहती थी लेकिन कुछ धर्मगुरुओं, रिश्तेदारों, पुराने ससुरालियों के दबाव में उसे आरिफ का दामन फिर से थामना पड़ा. बताया जाता है कि धर्मगुरुओं ने उसे धमकी दी थी कि अगर वह आरिफ का दामन नहीं थामेगी, तो उसके गर्भ के बच्चे को नाजायज माना जाएगा.

दबाव के चलते मीडिया के सामने गुड़िया ने आरिफ संग घर बसाने की बात कही. गुड़िया ने कहा था, "यही हर किसी का निर्णय है." तौफीक को इस सब की जानकारी नहीं थी. बाद में गुड़िया के चाचा ने भी ये खुलासा किया कि गुड़िया का ये फैसला दबाव में लिया गया था. आरिफ संग घर न बसाने पर पिता ने आत्महत्या की धमकी तक दी थी.

आरिफ ने भी मीडिया के सामने कहा कि गुड़िया का प्यार ही उसे वापस लाया है. आरिफ ने गुड़िया को तो स्वीकार लिया, लेकिन उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को अपनाने से इनकार कर दिया. एक महीने बाद पैदा हुए बच्चे को आरिफ ने इस शर्त पर अपनाया कि वह बड़ा होने पर अपने असली पिता के यहां भेज दिया जाएगा.

गुड़िया आने वाले कुछ महीनों में एनीमिया की शिकार हुई. एक बच्चे के बाद एक और गर्भपात की पीड़ा से वह और कमजोर हो गई. उसका इलाज कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि वह मानसिक दबाव में है.

लगातार बिगड़ती सेहत के कारण गुड़िया आरिफ से दोबारा मिलने के 15 महीनों के भीतर ही जनवरी 2006 में दिल्ली के सैनिक अस्पताल में मौत की नींद सो गई. आरिफ की मार्मिक कहानी पर प्रभाकर शुक्ला ने 'कहानी गुड़िया की' नाम से एक फिल्म भी बनाई थी.

First published: 26 July 2016, 12:06 IST
 
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