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राजस्थान : प्रवासी मजदूरों की कहानी- 1300 की जगह 4500 लिया गया किराया, मोबाइल बेचना पड़ा

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 May 2020, 11:29 IST

Coronavirus Lockdown ; लॉकडाउन के बीच कई राज्य सरकारों ने प्रवासी मजदूरों के लिए बसों की व्यवस्था की है, ताकि उनके घर जाने की व्यवस्था की जा सके. राजस्थान में प्रवासी श्रमिकों ने आरोप लगाया है कि निजी बसें उनसे सरकार द्वारा निर्धारित किराया से तीन गुना अधिक किराया ले रही हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार बिहार के सुपौल जिले एक प्रवासी मजदूर ने बताया कि उन्हें बस का किराया देने के लिए अपना मोबाइल फोन बेचना पड़ा.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार व्यक्ति ने कहा “निजी बस ने हमसे प्रति व्यक्ति 4,500 रुपये किराया लिया. जबकि जयपुर छोड़ने से पहले सरकारी अधिकारियों ने 2,400 रुपये से अधिक किराया नहीं देने को कहा था. व्यक्ति ने बताया जैसे ही हमने हाइवे में प्रवेश किया, चालक ने बस को पहले पेट्रोल पंप पर रोक दिया और कहा कि जब तक 4,000-4,500 रुपये नहीं देंगे बस नहीं चलेगी. ”उन्होंने कहा करीब 30 यात्रियों वाली यह बस शनिवार रात राजस्थान से रवाना हुई और सोमवार सुबह बिहार पहुंची.


भारत में पिछले तीन दिन से कोरोना वायरस के मामलों में बड़ा इजाफा देखने को मिला है, अब  भारत में COVID-19 पॉजिटिव मामलों की कुल संख्या 46433 हो गई है जिसमें 32134 सक्रिय मामले हैं. अब तक कुल 12727 लोग ठीक हुए हैं जबकि 1568 लोगों की मौत हुई है. पिछले 24 घंटों में 3900 नए COVID-19 मामले सामने आए और 195 मौतें हुई हैं.

व्यक्ति ने कहा “डेढ़ महीने से जयपुर में फंसे रहने के बाद मेरे पास बस के किराए के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे. मुझे अपना फोन 5,000 रुपये में बेचना पड़ा, मैंने इसे 12,000 रुपये में खरीदा था.” दूसरी ओर राजस्थान परिवहन विभाग के कमिश्नर रवि जैन ने कहा ''हमने नॉन-एसी के लिए 32 रुपये प्रति किमी और एसी बसों के लिए 40 रुपये प्रति किमी तय किए हैं. बसों में केवल 30 लोगों को अनुमति दी जा रही है. इस दर के अनुसार जयपुर से लगभग 1,275 किलोमीटर दूर सुपौल की यात्रा के लिए पूरी बस का किराया 40,800 रुपये होना चाहिए. यदि बस में 30 यात्री हैं, तो प्रत्येक व्यक्ति को लगभग 1,360 रुपये किराया देना होगा''.

रिपोर्ट के अनुसार आरएसआरटीसी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक नवीन जैन ने कहा “हमारी बसें एक बार उत्तराखंड गई, जिसका उत्तराखंड सरकार हमें किराया देगी. इसके अलावा राज्य के भीतर और राज्य की सीमा तक फंसे लोगों के लिए, कोई किराया नहीं लिया जा रहा है.” इसी तरह बिहार के सुपौल जिले के 32 वर्षीय मोहम्मद यूसुफ भी हैं, जो जयपुर में एक एक्सपोर्ट हाउस में एक दर्जी के रूप में काम करते हैं, उन्होंने कहा कि उन्हें बस किराया के रूप में 4,000 रुपये का भुगतान करने के लिए एक परिचित से 3,000 रुपये उधार लेने पड़े. उन्होंने कहा “मैंने प्रवासियों के लिए सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण किया था, लेकिन कोई मैसेज नहीं मिला.

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First published: 5 May 2020, 11:12 IST
 
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