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Independence day 2020: आखिर 15 अगस्त को लाल किले से ही क्यों फहराया जाता है तिरंगा? जानिए कारण

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 August 2020, 21:36 IST

15 अगस्त 2020 (Independence Day 2020) को एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) लाल किले (Red Fort) से तिरंगा झण्डा फहराएंगे और राष्ट्र को वहीं से संबोधित करेंगे. 15 अगस्त 1947 को पहली बार जवाहर लाल नेहरू (Jawahar Lal Nehru) ने झण्डा फहराया था और देश के नाम संबोधन दिया था.

हालांकि, कई लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि आखिर 15 अगस्त को प्रधानमंत्री जो झण्डा फहराते हैं, वो लाल किले से ही क्यों फहराते हैं? इस सवाल के जवाब में कोई विशेष कारण नहीं मिलता है, लेकिन कई बातें कही जाती हैं. लाल किले से ही तिरंगा फहराया जाए, इसके लिए कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है और ना ही इसको लेकर कोई कानूनी प्रावधान है.


जवाहरलाल नेहरू ने पहली बार लाल किले से ही तिरंगा फहराया था और जब तक वो जीवित रहे, लाल किले से ही तिरंगा फहराते रहे. इसके बाद बाकी के प्रधानमंत्रियों ने यहीं से झण्डा फहराया और ऐसे यह एक परपंरा बन गई. अब यह भारत की पहचान बन चुकी है और आजादी के 73 सालों बाद भी यह पंरपरा जारी है.

 

पहली बार लाल किले से ही क्यों फहराया गया तिरंगा

हां, इस सवाल का जवाब जरूर मिलता है. लेकि, इसका भी कोई अधिकारिक तौर पर लिखित दस्तावेज नहीं है, बस उस दौरान कुछ मीडिया रिपोर्ट में ऐसा कहा गया था. कहा जाता है कि जब भारत को आजादी मिली तो उसके बाद किसी ऐतिहासिक इमारत को जश्न बनाने और ध्वजारोहण के लिए चुना जाना था. पहले रायसीना हिल्स को इसके लिए चुना गया लेकिन उस दौरान वहां पर लॉर्ड माउंटबेटन रह रहे थे, ऐसे में उस इमारत पर तिरंगा फहराना सही नहीं माना गया. इसके बाद दिल्ली में उस दौरान सबसे महत्वपूर्ण इमारत लाल किला को चुना गया, जो शायद रायसीना हिल्स से भी महत्वपूर्ण थी. वहीं आजादी के बाद पहली बार नेहरू ने यही पर ध्वजारोहण किया.

 

लाल किले का इतिहास

लाल किले का निर्माण साल 1638 में शुरू हुआ था और कहा जाता है कि यह करीब 10 साल में बनकर तैयार हुआ था. इसके बाद मुगलों ने करीब 200 सालों तक लाल किले पर राज किया. इस दौरान जिसने भी दिल्ली पर हमला किया, उस केंद्र में लाल किला रहा. हालांकि, अंग्रेजों के आने के बाद जब मुगल कमजोर हुए, तो उसके बाद सत्ता को हथियाने के केंद्र में लाल किला ही रहा. 1857 में हुए आजादी के पहले स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र भी लाल किला ही रहा. इतना ही नहीं आजादी से कुछ सालों पहले सुभाष चंद्र ने दिल्ली चलों का जो नारा दिया था तो उसका मतलब लाल किले पर आकर अपनी ताकत दिखाना ही था.

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First published: 13 August 2020, 17:52 IST
 
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