Home » इंडिया » Study says premium priced packaged super market rice are not good for health
 

ब्राउन राइस के नाम पर आपकी थाली में परोसा जा रहा है सुपर पॉलिश्ड चावल, रिसर्च में हुआ खुलासा

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 June 2019, 11:11 IST

किसी ब्रांडेड कंपनी के पैकेट में आपको मिलने वाला हर सामान असली नहीं है. ये बात ब्राउन राइस के मामले में तो एकदम सटीक साबित हुई है. दरअसल, हम पैकेट वाले ब्राउन राइस को अनपॉलिश्ड मानने की लगातार गलती करते हैं, लेकिन इसकी हकीकत कुछ और ही है. यही नहीं 'डायबीटिक फ्रेंडली' यानि शुगर के मरीजों के लिए बेहतर कहे जाने वाले चावल भी आपको उबालकर दिए जा रहे हैं.

इस बात का खुलासा मद्रास डायबीटिक रिसर्च फाउंडेशन (MDRF) के फूड साइंटिस्टों ने किया है. उन्होंने सुपर मार्केट के 15 तरह के 'हेल्दी' चावलों पर अपनी रिसर्च की. जिसके नतीजे चौंकाने वाले आए. ज्यादातर मामलों में पैकेट पर जो दावे किए गए उनमें ज्यादातर झूठ साबित हुए हैं.


बता दें कि एमडीआरएफ की फूड ऐंड न्यूट्रिशन रिसर्च साइंटिस्ट सुधा वासुदेवन हाल ही में 'जर्नल ऑफ डायबीटॉलजी' में प्रकाशित एक स्टडी की सह-लेखिका हैं. उन्होंने बताया कि,उनके पास तमाम डायबीटिक मरीज चावल की नई वैराइटीज के साथ आ रहे थे. जिनके बारे में दावा किया जा रहा था कि ये जीरो कोलेस्ट्रॉल और शुगरफ्री हैं. उसके बाद उन्होंने इन दावों की जांच करने की ठानी और इसी तरह के लोकप्रिय चावलों में से 15 की जांच की की.

इस जांच में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए. जिसमें सबसे चौंकाने वाला नतीजा ब्राउन राइस के एक ब्रैंड का आया. जिसका दावा था कि उसका ग्लिसेमिक इंडेक्स (GI) महज 8.6 है. वासुदेवन बताती हैं कि इंटरनैशनल GI टेबल में किसी चावल में इतने कम GI का आजतक कभी कोई जिक्र ही नहीं किया गया है. चावल में निम्नतम GI करीब 40 के आस-पास पाया गया है.

बता देंकि GI किसी खाद्य पदार्थ में कार्बोहाइड्रेट का स्तर बताता है. कार्बोहाइड्रेट से खून में ग्लूकोज का स्तर प्रभावित होता है. कम GI वाले खाद्य पदार्थ सेहत के लिए अच्छे माने जाते हैं. 55 से नीचे GI को कम माना जाता है. 44-69 GI को मध्यम और 70 से ऊपर को उच्च माना जाता है. ऐसे खाद्य पदार्थ न सिर्फ ब्लड शुगर घटाते हैं, बल्कि हार्ट से जुड़ी बीमारियों और टाइप 2 डायबीटीज का भी खतरा कम करते हैं. दाल और सब्जियों में कम GI पाया जाता है. वहीं अनाजों में GI का स्तर मध्यम होता है.

प्रतीकात्मक फोटो

इस स्टडी में जांच के दौरान चावल को आधा उबला हुआ पाया गया. साथ ही इनपर पॉलिश की गई थी. साथ ही आधे उबले होने की वजह से उनका कलर ब्राउन हो गया था. पकाते वक्त ये चावल और ज्यादा पानी सोखते हैं, जिससे उनमें स्टार्च का स्तर बढ़ता है. इसके चलते इनमें GI का स्तर भी बढ़ जाता है.

यही नहीं शुगर फ्री और जीरो कोलेस्ट्रॉल वाले राइस के बारे में किए जाने वाले दावे भी इस शोध में झूठे साबित हुए. इस शोध में शामिल शोभना का कहना है कि चावल में जो स्टार्च होता है, वह पाचन के वक्त ग्लूकोज में बदल जाता है. इस तरह कोई भी चावल शुगर फ्री नहीं हो सकता.

स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले उत्तर प्रदेश और बिहार फिसड्डी, पहले नंबर पर केरल

First published: 26 June 2019, 11:12 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी