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मोदी सरकार के दखल के बाद सुब्रमण्यम स्वामी और IIT Delhi के बीच सुलझ सकता है सैलरी विवाद

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 April 2018, 15:18 IST

आईआईटी दिल्ली और भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी के बीच बीते 45 सालों से विवाद चल रहा है. ये विवाद स्वामी की तनख्वाह को लेकर है. हालांकि ऐसा कहा जा रहा है कि कोर्ट केबाहर भीइस विवाद को सुलझाया जा सकता है. क्योंकि मोदी सरकार ने इस मूड पर थोड़ी नरमी दिखाई है. है.


द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक ये मामला दिसंबर 1972 का है. गौरतलब है कि स्वामी 31 मार्च 1991 तक आईआईटी दिल्ली में पढ़ाते थे. इसी के साथ उन्होंने कुछ समय अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में भी पढ़ाया. इसके आधार पर आईआईटी दिल्ली ने उनकी कुछ तनख़्वाह और भत्ते आदि रोक लिए.

इस मामले में स्वामी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया तो आईआईटी ने ये दलील दी कि स्वामी ने संस्थान में काम करते हुए समानांतर रूप से हार्वर्ड में भी पढ़ाया इसलिए अब वह उन्हें उनका पूरा बक़ाया वेतन-भत्ता चुकाने के लिए बाध्य नहीं है.

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संस्थान केंद्र सरकार के मूलभूत नियम (एफआर)-54 के तहत सिर्फ़ उतने पैसे का भुगतान करेगा जो स्वामी को हार्वर्ड से हुई आमदनी और बकाए के अंतर के रूप में बच रहता है. यानी मान लें कि संस्थान पर स्वामी बकाया तीन करोड़ रुपए है और इस बीच उन्होंने एक करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय हार्वर्ड से हासिल की तो आईआईटी दिल्ली उन्हें तीन के बज़ाय सिर्फ़ दो करोड़ रुपए का भुगतान करना चाहता है.

सूत्रों के अनुसार आईआईटी दिल्ली के इस रुख़ का यूपीए (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री रहे कपिल सिब्बल ने समर्थन किया था. लेकिन मोदी सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर अब इस रुख़ से पलट गए हैं. उन्होंने आईआईटी को लिखा है कि स्वामी का मामला एफ़आर-54 के तहत नहीं आता. क्योंकि इन नियमों को संस्थान के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर ने 1992 में अपनाया था. जबकि स्वामी का मामला इससे पहले का है.

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बताया जाता है कि आईआईटी-दिल्ली को जावड़ेकर का यह पत्र पिछले सप्ताह ही मिल चुका है. इस मामले में बोर्ड ऑफ़ गवर्नर की अगली बैठक में चर्चा होगी. संभव है उसमें मोदी सरकार की अपेक्षा के अनुरूप कार्रवाई पर सहमति बन जाए. और स्वामी के साथ विवाद अदालत के बाहर ही उनके पक्ष में हल हो जाए. ऐसी उम्मीद है कि मोदी सरकार के हस्तक्षेप के बाद ये मामला अदालत के बाहर ही निपटा लिया जाएगा.

 

First published: 10 April 2018, 15:18 IST
 
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