Home » इंडिया » Subramanian Swamy on Section 377 says It is against Hindutva we can not celebrate it
 

सुब्रमण्यम स्वामी ने समलैंगिकता को बताया हिंदुत्व के खिलाफ

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 July 2018, 12:31 IST

सुब्रमण्यम स्वामी ने धारा 377 को खत्म करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई को लेकर बड़ा बयान दिया है. स्वामी ने कहा ये हिंदुत्व के खिलाफ है. स्वामी ने समलैंगिकता को 'हिंदुत्व विरोधी' बताते हुए कहा कि ऐसे रुचि रखने वालों का इलाज कराने की जरूरत है.

स्वामी ने कहा, "ये सामान्य चीज नहीं है. हम इसका जश्न नहीं मना सकते हैं. ये हिंदुत्व के खिलाफ है. हमें मेडिकल रिसर्च में धन लगाकर पता करना चाहिए कि क्या इसका इलाज हो सकता है." उन्होंने कहा कि अगर यह ठीक हो सकता है तो हमें मेडिकल रिसर्च में निवेश करना चाहिए. केंद्र सरकार को 7 या 9 न्यायाधीशों की बेंच रखने पर विचार करना चाहिए.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ मामले की सुनवाई कर रही है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंग्टन आर नरीमन, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस इंदू मल्होत्रा इस पीठ में शामिल हैं. 

दरअसल, दो वयस्कों के बीच सहमति से शारीरिक संबंधों को फिर से अपराध की श्रेणी में शामिल करने के शीर्ष अदालत के फैसले को कई याचिकाएं दाखिल कर चुनौती दी गई है. केंद्र सरकार ने समलैंगिक संबंधों पर जनहित याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए वक्त देने का अनुरोध किया था. लेकिन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई टालने से इनकार कर दिया.

पढ़ें- शुरू होने से पहले JIO यूनिवर्सिटी पर मेहरबान हुई मोदी सरकार, बॉम्बे-दिल्ली IIT के साथ ये दर्जा

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि आपसी सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को अपराध नहीं माना जाएगा. हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट इस फैसले को पलटते हुए समलैंगिक संबंधों को आईपीसी की धारा 377 के तरह अवैध घोषित कर दिया.

First published: 10 July 2018, 12:29 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी