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सुब्रत रॉय सहारा: वक्त सालों की धुंध से यूं निकल गया

प्रमोद अधिकारी | Updated on: 9 May 2016, 12:17 IST
QUICK PILL
  • सुब्रत राय की मां छवि राय की मृत्यु के बाद उनकी अंतिम संस्कार यात्रा को \r\nलेकर पूरे देश के सहारा कर्मचारियों का जमावड़ा गोमती नगर स्थित सहारा शहर \r\nमें लगा था, पूरे लखनऊ का मीडिया भी सहारा शहर में जमा हुआ था
  • सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, महानायक अमिताभ बच्चन अपने अभिनेता पुत्र\r\n अभिषेक बच्चन के साथ सहारा शहर पहुंचे और उन्होंने छवि राय को श्रद्धांजलि\r\n अर्पित की

लखनऊ शहर ने वो दौर भी देखा है जब पूरे शहर की सड़कें लाइट की खूबसूरत लड़ियों से पखवाड़े भर के लिए जगमगा दी गईं थीं. भंडारा जो शुरू हुआ तो चूल्हे की आग हफ्तों नहीं बुझी. इतने व्यंजन की उंगलियों पे गिने न जा सकें और इतने मेहमान की कारवां थमता नहीं था. यह सुब्रत रॉय के बेटे सीमांतो राय की शादी का वक्त था.

पुत्र की शादी के समय सुब्रत रॉय के जलवा और पहुंच से लखनऊ दो-चार हुआ था. इससे पहले लखनऊ के लोग किंवदंतियों में सुनते-सुनाते थे कि नवाब वाजिद अली शाह के जमाने में लखनऊ इस कदर जलवाफरोश हुआ करता था.

सुब्रत रॉय के जलवे से लखनऊ उस समय दो-चार हुआ था, जब बेटे सीमांतो राय की शादी थी

उस शादी में कम्युनिस्टों के अलावा बाकी सभी पार्टियों के दिग्गज आए हुए थे. मुंबई के कारपोरेट घरानों का जमघट था. अदि गोदरेज और उनकी पत्नी परमेश्वर गोदरेज भी थे. परमेश्वर अपने परिधान के कारण विशेष चर्चा का विषय रही थीं. लाल कृष्ण आडवाणी भी इस विवाह के लिए विशेष विमान से दिल्ली से आए थे. लंबे समय तक इस विवाह की चर्चा रही.

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दो साल पहले दिल्ली भी इसी किस्म के जश्न का चश्मदीद बना. यह मौका सुब्रत रॉय सहारा के पौत्र के अन्नप्राशन संस्कार का था. दिल्ली की हूज़ हू सर्किल के सभी लोग इसमें शामिल थे. दिल्ली टाइम्स के दो ब्रॉडशीट लब्धप्रतिष्ठ लोगों के आयोजन में शिरकत से भरे थे.

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इसके बाद हालात बहुत तेजी से बदले. सुब्रत सहारा को सुप्रीम कोर्ट ने जेल भेज दिया और सुख के ज्यादातर साथी अपने-अपने रास्ते चले गए. लगभग दो साल का समय तिहाड़ जेल में बिता चुके सुब्रत सहारा को शनिवार को अदालत ने महीने भर की पेरोल दी तो सरगर्मियां एक बार फिर से बढ़ गईं. यह पेरोल उन्हें उनकी मां छवि रॉय के देहांत के कारण दिया गया है.

सुब्रत राय की मां छवि राय की मृत्यु के बाद उनकी अंतिम संस्कार यात्रा को लेकर पूरे देश के सहारा कर्मचारियों का जमावड़ा गोमती नगर स्थित सहारा शहर में लगा था.

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लोगों के बीच जहां एक ओर दो साल बाद सहारा प्रमुख को देखने की बेचैनी थी तो वहीं कुछ लोग इस पर भी नजरें टिकाए हुए थे कि कौन-कौन बड़ा नाम सुब्रत राय की माता जी को श्रद्धांजलि देने आ रहा है.

पूरे लखनऊ का मीडिया भी सहारा शहर में जमा हुआ था. सियासत, फिल्म और क्रिकेट की दुनिया में उनके संबंध एक समय हर जगह चर्चा का विषय हुआ करते थे. मगर जैसे-जैसे शव यात्रा सहारा शहर से बाहर निकलती गई लोगों में चर्चा होने लगी के जब इंसान का वक़्त बुरा हो तब साथ खड़ा होने वाले कम मिलते हैं.

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हालांकि सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, महानायक अमिताभ बच्चन अपने अभिनेता पुत्र अभिषेक बच्चन के साथ सहारा शहर पहुंचे और उन्होंने छवि राय को श्रद्धांजलि अर्पित की. इसके अलावा प्रदेश के सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव, कांग्रेस के राज बब्बर व प्रमोद तिवारी भी सहारा प्रमुख की मां की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए पहुंचे.

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लखनऊ के गोमती नगर स्थित सहारा शहर का नजारा खुशी और गम का मिश्रण था. एक तरफ माहौल में सुब्रत राय की मां छवि राय की मृत्यु का गम था दूसरी तरफ दो साल बाद सुब्रत रॉय के जेल से बाहर आने की कुछ ख़ुशी भी थी.

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लेकिन लोगों के बीच चर्चा इसी बात को लेकर थी कि रॉय की माताजी के अंतिम संस्कार में देश के नामी गिरामी लोग नदारद थे. जो लोग दो साल पहले अन्नप्राशन संस्कार में लाइन लगाए हुए थे वे कहां गए? ये वही सहारा शहर था जहां दो साल पहले तक राजनेताओं, फ़िल्मी सितारों व खेल की दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गज टहलकदमी करते दिखते थे. खुद सहाराश्री की निगाहें बार-बार दरवाजे की ओर अकस्मात चली जाती थीं, वे किसी को खोज रहे थे. जाहिर है निगाहों मेें संतोष नहीं था.

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उनके बेटों की शाही शादी को लोग आज भी भूले नहीं हैं जिसमें देश-विदेश की बड़ी हस्तियां शामिल हुई थीं. दुःख की इस घड़ी में सहारा प्रमुख को सहारा देने वाले बहुत कम नाम मौजूद थे. सुब्रत रॉय पिछले दो साल से निवेशकों का पैसा वापस नहीं कर पाने के चलते दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं.

मां छवि राय के निधन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सहारा श्री को चार हफ्तों की पेरोल दी है

शुक्रवार को उनकी मां छवि राय के निधन के बाद सुप्रीम कोर्ट से उनको चार हफ्ते की पेरोल मिली है. जेल से रिहा होने के बाद वे देर रात लखनऊ स्थित सहारा शहर पहुंच गए थे. शनिवार की शाम लगभग चार बजे उनकी मां की शवयात्रा निकाली गई.

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सहारा द्वारा विकसित किये गए बैकुंड धाम में सुब्रत राय ने अपनी मां के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी.

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शवदाह स्थल पर उनके साथ उनके छोटे भाई जयव्रत व दोनों बेटों के अलावा बड़ी संख्या में सहारा के कर्मचारी भी उपस्थित थे.

मुखाग्नि देने के बाद जब सुब्रत राय अपने करीबी लोगों के साथ बैकुंड धाम में बने पार्क में बैठकर चर्चा करने लगे तो सहारा के कर्मचारियों में उनके पैर छूने की होड़ लग गई, सुरक्षा कर्मियों ने किसी तरह घेरा बनाकर लोगों को उनके पास पहुंचने से रोका.

First published: 9 May 2016, 12:17 IST
 
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