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मध्याह्न भोजन योजना से अंडा हटाना चाहती हैं सुमित्रा महाजन

विशाख उन्नीकृष्णन | Updated on: 10 February 2017, 1:50 IST
QUICK PILL
  • जैन संत आचार्य विद्यासागर से मुलाकात के दौरान लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने मध्य प्रदेश में मध्याह्न भोजन योजना से अंडे को हटाए जाने की उनकी मांग पर सहमति जताई है.
  • महाजन ने आचार्य से कहा कि वह इस मुद्दे को संबंधित विभाग के समक्ष उठाएंगी ताकि इसे प्रतिबंधित किया जा सके.
  • महाजन की कथित सहमति वैसे समय में सामने आई है जब रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश की 49.4 फीसदी आबादी के मांसाहारी होने की बात सामने आ चुकी है.

निर्विरोध लोकसभा स्पीकर चुनी गईं सुमित्रा महाजन की कई कारणों से तारीफ की जाती है. इसमें वह फैसला शामिल हैं जिसके तहत उन्होंने अनुशासन तोड़ने के मामले में कांग्रेस के 25 सांसदों को पांच दिनों के लिए निलंबित कर दिया था.

महाजन के साथ कई विवाद भी जुड़े हुए हैं. मसलन अपने आधिकारिक इस्तेमाल के लिए 50 लाख रुपये की महंगी कार और संसदीय सत्र के बीच आरक्षण की समीक्षा करने की अपील. उनके खाते में एक और विवाद जुड़ता नजर आ रहा है. सोमवार को उन्होंने जैन संत आचार्य विद्यासागर से मुलाकात की और खबरों के मुताबिक उन्होेंने मध्याह्न भोजन योजना से अंडे को हटाए जाने की उनकी मांग पर सहमति जताई है.

महाजन ने आचार्य से कहा कि वह इस मुद्दे को संबंधित विभाग के समक्ष उठाएंगी ताकि इसे प्रतिबंधित किया जा सके.

आधारहीन अपील

महाजन की कथित सहमति वैसे समय में सामने आई है जब रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश की 49.4 फीसदी आबादी के मांसाहारी होने की बात सामने आ चुकी है.

सर्वे में कहा गया है कि मध्य प्रदेश के 51 फीसदी पुरुष और 47 फीसदी महिलाएं मांसाहारी हैं. सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर इस सर्वे को ठीक ढंग से किया जाता और इसमें एससी और एसटी आबादी को शामिल किया जाता तो मध्य प्रदेश में मांसाहार करने वालों की संख्या और अधिक होती.

ऐसा लगता है कि मध्य प्रदेश सरकार सर्वे के आंकड़े को मानने के मूड में नहीं है. 2010 में राज्य सरकार ने आंगनवाड़ी और स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना के दौरान परोसे जाने वाले खाने से अंडा को हटाए जाने का आदेश दिया था.

मध्य प्रदेश के 51 फीसदी पुरुष और 47 फीसदी महिलाएं मांसाहारी हैं.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आदेश के बाद स्कूलों में  मध्याह्न भोजन में अंडा परोसे जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया क्योंकि उन्होंने जैन साधुओं को ऐसा करने का वादा किया था.

2010 में उन्होंने कहा था, 'जब तक मैं मुख्यमंत्री रहूंगा तब तब आंगनवाड़ी में अंडा नहीं परोसा जाएगा.'

रिपोर्ट्स के मुताबिक जैन पंडित ने भोजन में केला और अन्य फलों को दिए जाने की वकालत की है.

क्यों गलत है अंडे पर प्रतिबंध

दिल्ली में राइट टू फूड कैंपेन की दीपा सिन्हा बताती हैं, 'अंडा न केवल प्रोटीन और कैल्शियम का बेहतरीन स्रोत हैं बल्कि इसे परोसा जाना भी आसान है.'

सिन्हा ने कहा, 'अंडे का एकमात्र विकल्प दूध हो सकता है लेकिन यह जल्दी ही खराब हो जाता है और इसमें  आसानी से मिलावट की जा सकती है. आदिवासी इलाकों में अंडा, दूध के मुकाबले ज्यादा लोकप्रिय है. इसके अलावा मध्याह्न भोजन में अंडा दिया जाना अनिवार्य नहीं है. कोई बच्चा इसे नहीं खाने का विकल्प चुन सकता है.'

मध्य प्रदेश में देश के अन्य राज्यों के मुकाबले आदिवासियों की बड़ी आबादी है. जैन समुदाय ने अंडे के बदले काजू और बादाम का विकल्प दिया है लेकिन यह अंडे के मुकाबले महंगी सामग्री है.

भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता और खाद्य विश्लेषक सचिन जैन भी सिन्हा के तर्क से सहमत नजर आते हैं.

जैन ने कहा, 'मध्य प्रदेश में प्रोटीन की कमी से होने वाली बीमार लोगों की तादाद सबसे ज्यादा है. मध्याह्न भोजन योजना में अंडा सबसे अहम स्रोत है. जब राज्य सरकार ने अंडा हटाने का फैसला लिया तब उन्होंने संबंधित समुदायों से इस बारे में विमर्श नहीं किया जो अपने बच्चों को आंगनवाड़ी में भेजते हैं. यह एक अलोकतांत्रिक प्रक्रिया है.'

उन्होंने कहा, 'मध्य प्रदेश सरकार की अंडे के बदले दूध दिए जाने की योजना बुरी तरह विफल रही है. दूध की मात्रा और गुणवत्ता को लेकर कई सारी शिकायतें हैं. अंडे के मामले में दोनों समस्याओं का समाधान हो जाता है.'

आंगनवाड़ी में गर्भवती महिलाओं को पूरक आहार दिया जाता है और यह भोजन पूरा परिवार खाता है. ऐसे में अगर अंडे को प्रतिबंधित किया गया तो पूरा परिवार प्रोटीन की कमी से पीड़ित होगा.

जैन बताते हैं कि जो लोग अंडे को हटाने की वकालत कर रहे हैं वह या उनके बच्चे इस योजना के लाभार्थी नहीं हैं. उन्हें बच्चों के भोजन के बारे में बेहद कम जानकारी है.

आंकड़ों की जुबानी

मध्य प्रदेश देश के उन राज्यों में शामिल हैं जहां बच्चों में सबसे अधिक कुपोषण की समस्या है. बाल और महिला विकास मंत्रालय की तरफ से 2013-14 में कराए गए सर्वे में यह बात सामने आ चुकी है कि कुपोषित बच्चों की आबादी भारत में 29.4 फीसदी है. यह सर्वे यूनिसेफ की मदद से किया गया था.

मध्य प्रदेश में कम वजन वाले बच्चों की आबादी 51.3 फीसदी है. मई 2016 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मध्य प्रदेश सरकार से उसके फैसले पर विचार करने के लिए कहा है. 

फिलहाल तमिलनाडु, झारखंड, आंध्र प्रदेश, बंगाल, तेलंगाना, ओडिशा, असम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश में मध्याह्न भोजन योेजना में अंडा परोसा जाता है. 

First published: 15 June 2016, 9:53 IST
 
विशाख उन्नीकृष्णन @catchnews

एशियन कॉलेज ऑफ़ जर्नलिज्म से पढ़ाई. पब्लिक पॉलिसी से जुड़ी कहानियां करते हैं.

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