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सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में 1528 मुठभेड़ों की जांच का दिया आदेश

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 July 2016, 16:32 IST

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में सुरक्षाबलों द्वारा किए गए 1528 मुठभेड़ों की जांच का आदेश दिया है. एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह फैसला दिया है.

याचिका में फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाते हुए एसआईटी या सीबीआई जांच की मांग की गई थी. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला केंद्र सरकार और सेना के लिए झटका माना जा रहा है.

जांच एजेंसी पर बाद में फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि अगर सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून यानी आफ्सपा लगा है और इलाका डिस्टर्ब एरिया (अशांत इलाके) के तहत क्लासीफाइड भी है, तो भी सेना या पुलिस ज्यादा फोर्स का इस्तेमाल नहीं कर सकते.

पीआईएल पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्रिमिनल कोर्ट को एनकाउंटर मामलों के ट्रायल का अधिकार है. साथ ही अदालत ने कहा कि सेना और पुलिस के ज्यादा फोर्स और एनकाउंटरों की स्वततंत्र जांच होनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मणिपुर के 1528 एनकाउंटरों की जांच होनी चाहिए. इस मामले में कौन सी एजेंसी जांच करेगी यह बात में तय किया जाएगा.


12 साल के दौरान फर्जी एनकाउंटर का आरोप

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने अमाइक्स क्यूरी से उन सभी 62 मामलों की स्टेटस रिपोर्ट मांगी, जिन्हें जस्टिस संतोष हेगड़े या एनएचआरसी (राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग) ने फर्जी बताया. कोर्ट ने कहा, सेना हर केस में कोर्ट आफ इंक्वायरी करने को स्वतंत्र है.

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में सेना पर 2000 से 2012 के बीच करीब 1500 लोगों का फर्जी एनकाउंटर करने का आरोप है. हालांकि सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा था कि भारतीय सेना ने जवाबी कारवाई के तहत ये एनकाउंटर किए थे. 

हेगड़े कमेटी ने भी उठाए थे सवाल

केंद्र ने दलील दी थी कि सेना को यह कार्रवाई विदेशी ताकतों को रोकने और देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए करनी पड़ी. 2013 में बनाई गई जस्टिस संतोष हेगड़े की कमेटी ने 1500 एनकाउंटरों की जांच की सिफारिश की थी.

हालांकि केंद्र सरकार ने संतोष हेगड़े रिपोर्ट को रद्द करने की मांग की है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने करीब आठ मामलो की जांच के आदेश दिए थे.

First published: 8 July 2016, 16:32 IST
 
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