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सुप्रीम कोर्ट ने कॉल ड्राप मामले में ट्राई और हाईकोर्ट का फैसला पलटा

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST
सुप्रीम कोर्ट ने आज कॉल ड्राप मामले में अहम फैसला सुनाते हुए ट्राई के आदेश को रद्द कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कॉल ड्राप होने पर टेलीकॉम कंपनियों (सेवाप्रदाताओं) की ओर से उपभोक्ताओं को कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा.

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि ट्राई का आदेश पूरी तरह से मनमाना और अपारदर्शी है. सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला कॉल ड्राप मामले में टेलीकॉम कंपनियों की ओर से दाखिल याचिका पर सुनाया है.

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कॉल ड्रॉप मामले पर ट्राई के फैसले पर रोक लगा दी. कोर्ट के इस आदेश से सेवाप्रदाताओं को बड़ी राहत मिली है और इसके साथ ही इस मामले में दिया गया दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला अपने आप रद्द हो गया है. 

इससे पहले टेलीकॉम कंपनियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में ट्राई के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने अपना फैसले ट्राई के पक्ष में दिया था. इसके बाद इस कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

सुप्रीम कोर्ट में ट्राई की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने अपनी दलील में कहा कि टेलीकॉम कंपनियों को उपभोक्ताओं की कोई चिंता नहीं है कि कॉल ड्राप से उन्हें लगातार कितना नुकसान हो रहा है.

एजी ने कहा कि करोड़ों उपभोक्ताओं के देश में चार-पांच मोबाइल कंपनियों ने कब्जा कर रखा है. इनका रोजाना 250 करोड़ का राजस्व है, लेकिन निवेश कम है.

रोहतगी ने कहा कि टेलीकॉम कंपनियों का राजस्व बड़ी तेजी से बढ़ रहा है और उसकी तुलना में निवेश नहीं हो रहा है. देश में टेलीकॉम सेक्टर का निवेश चीन जैसे देशों की तुलना में काफी कम है.

मोबाइल टावर की कमी बहाना


अटॉर्नी जनरल ने कहा कि हम उनसे उपभोक्ताओं के हक के लिए लड़ रहे हैं. कंपनियों  की ओर से मोबाइल टावरों की कमी केवल बहाना है.

हमारे देश में 50 करोड़ मोबाइल उपभोक्ता हैं जिसमें 96 फीसदी प्री पेड वाले हैं और 4 फीसदी पोस्ट पेड वाले हैं. देश में औसतन रीचार्ज 10 रुपये का होता है और अगर ऐसे लोगों का कॉल ड्राप हो तो उनका बड़ा नुकसान होता है.

गौरतलब है कि इससे पूर्व दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि कॉल ड्राप पर मोबाइल कंपनियों को मुआवजा देना होगा. हाईकोर्ट ने कहा था कि 1 जनवरी, 2016 से कंपनियों को कॉल ड्राप होने पर उपभोक्ताओं को मुआवजा देना होगा.

ट्राई ने दिया था मुआवजे का आदेश


ट्राई ने 16 अक्टूबर 2015 को आदेश जारी किया था कि मोबाइल सर्विस कंपनियां कॉल ड्रॉप होने की दशा में 1 रुपया उपभोक्ता को बतौर मुआवजा देंगी, जो एक दिन में 3 रुपये हो सकता है.

इसके खिलाफ मोबाइल कंपनियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी. कंपनियों की ओर से दी गई दलील थी कहा गया था कि ट्राई का यह आदेश मनमाना और गैरकानूनी है, इसे रद्द किया जाना चाहिए. कई कारणों से ये संभव नहीं है कि कॉल ड्रॉप की स्थिति को रोका जा सके. लेकिन मुआवजा लागू होने से कंपनियों को बड़ा घाटा होगा.

कंपनियों ने अपनी दलील में यह भी कहा था कि इस मामले में ट्राई को कोई कानून बनाने का अधिकार नहीं है. वहीं ट्राई का कहना है कि मोबाइल कंपनियों ने उपभोक्ताओं की संख्या के हिसाब से टावर नहीं लगाए हैं जिसकी वजह से कॉल ड्राप की समस्या सामने आ रही है.

First published: 11 May 2016, 1:26 IST
 
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