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संसद को सुप्रीम कोर्ट की सलाह : बाल यौन शोषण के लिए बने कड़ा कानून

आशीष पाण्डेय | Updated on: 10 February 2017, 1:47 IST
QUICK PILL
  • सुप्रीम कोर्ट नेे बाल यौन शोषण के मामले में संसद को सख्त कानून बनाने की सलाह दी है. हालांकि यह सलह है जिसे मानने के लिए संसद बाध्य नहीं है.

बच्चों के यौन शोषण के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संसद को बच्चों के साथ इस तरह के अपराध करने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाने पर विचार करना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार के संदर्भ में 'बच्चों' की परिभाषा पर भी सरकार से पुनर्विचार करने की बात कही है. के लिए संसद को गंभीरता से सोचना चाहिए.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट नेे कम उम्र और दस वर्ष से कम आयु के बच्चों के बीच के अंतर को साफ किया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक कोर्ट ने कहा कि संसद को बच्चों के यौन शोषण अपराध की गंभीरता को देखते हुए इस पर अलग से सख्त कानून बनाना चाहिए. जिससे इस तहत के मामले में अपराधियों के लिए कठोर सजा का प्रावधान हो सके.

कोर्ट ने बाल अपराध और उसकी प्रकृति की विवेचना करते हुए कहा कि नवजात शिशुओं और दस वर्ष से कम उम्र की बच्चियों के साथ बलात्कार और यौन शोषण की घटनाएं अपराधी के घृणित, पाश्विक और विकृत मानसिकता को दर्शाती हैं.

कोर्ट ने संसद को इस मामले में कोई दिशा निर्देश न देकर केवल सुझाव मात्र दिया है.

सुप्रीम कोर्ट का यह सलाह संसद के लिए बाध्यकारी नहीं है. कोर्ट के अनुसार यह संसद की इच्छा पर निर्भर करेगा कि वह इस सलाह को माने या कि नहीं.

First published: 14 January 2016, 6:19 IST
 
आशीष पाण्डेय @catchhindi

संवाददाता, कैच हिंदी. बीएचयू से पॉलिटिकल साइंस(आनर्स). जामिया मिल्लिया इस्लामिया एमसीआरसी से मॉस कॉम. मल्टी-मीडिया जर्नलिस्ट के तौर पर डिजिटल, टेलीविज़न, डॉक्यूमेंट्री, रेडियो, सोशल मीडिया कैंपेनिंग, इलेक्शन कैंपेनिंग के लिए काम कर चुके हैं.

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