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सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से पूछा- दोषी व्यक्ति कैसे चला सकता है पार्टी?

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 February 2018, 9:15 IST

सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से पूछा है कि जब कोई अपराधी चुनाव नहीं लड़ सकता तो वह किसी भी पार्टी का प्रमुख कैसे बन सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि आपराधिक मामले में दोषी ठहराया जा चुका और सजायाफ्ता शख्स कैसे किसी राजनीतिक दल का प्रमुख बन सकता है? कोर्ट ने यह भी कहा कि जो खुद चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो चुका है, वह कैसे उम्मीदवार चुन सकता है?

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने इसे कोर्ट के फैसले के खिलाफ बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार इसका जवाब दे. इसके बाद सरकार ने जवाब देने के लिए समय मांगा है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने तीन हफ्ते की मोहलत देते हुए अगली सुनवाई 26 मार्च को तय कर दी.

 

चीफ जस्टिस ने कहा कि यह गंभीर मामला है. कोर्ट ने पहले आदेश दिया था कि चुनाव की शुद्धता के लिए राजनीति में भ्रष्टाचार का विरोध किया जाना चाहिए. चूंकि ऐसे लोग इस मामले में अकेले कुछ नहीं कर सकते, इसलिए अपने जैसे लोगों का एक संगठन बनाकर अपनी मंशा पूरी करते हैं.

कोर्ट ने कहा कि ऐसा स्कूल या हॉस्पिटल चलाने के लिए किया जाए तो उसमें कोई आपत्ति नहीं, लेकिन जब बात देश का शासन चलाने की है तो मामला अलग हो जाता है. यह उनके पहले दिए गए फैसले के खिलाफ है.

 

कोर्ट ने कहा है, "सज़ा पाने वाला खुद चुनाव नहीं लड़ सकता लेकिन उसके पार्टी पदाधिकारी बने रहने या नई पार्टी बनाने पर कोई रोक नहीं. एक अपराधी ये तय करता है कि चुनाव में कौन लोग खड़े होंगे. कानून में ये बड़ी कमी है."

हालांकि इस मामले की पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि वो सजायाफ्ता लोगों को पार्टी बनाने से रोकने पर सुनवाई नहीं करेगा. तब कोर्ट ने कहा था कि राजनीतिक दल बना कर अपने विचार लोगों तक पहुंचाने से किसी को नहीं रोका जा सकता. कोर्ट ने याचिका के सिर्फ एक बिंदु को सुनवाई लायक माना था. जिसमें चुनाव आयोग को पार्टियों का पंजीकरण रद्द करने का अधिकार देने की बात कही गई थी.

First published: 13 February 2018, 9:13 IST
 
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