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कर्नाटक को तीन दिन के लिए कावेरी का पानी तमिलनाडु को छोड़ने का आदेश

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 September 2016, 16:16 IST
(फाइल फोटो)

कावेरी नदी के जल बंटवारे पर कर्नाटक को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. सर्वोच्च अदालत ने कर्नाटक सरकार को आदेश दिया है कि वो अगले तीन दिन के लिए तमिलनाडु को कावेरी नदी का पानी मुहैया कराए.

इससे पहले कर्नाटक ने हाथ खड़े करते हुए सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वो पानी नहीं दे सकता, लिहाजा अदालत को अपने आदेश में बदलाव करना चाहिए. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आज के आदेश के बाद कर्नाटक को फिलहाल कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि तमिलनाडु को तीन दिन के लिए रोजाना 6 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जाए. इस मामले में अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी.

इससे पहले कर्नाटक सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि उसके जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं है इसलिए वह अदालत के आदेश के मुताबिक तमिलनाडु को पानी छोड़ने में असमर्थ है.

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान पारित प्रस्ताव को दरकिनार करते हुए यह आदेश सुनाया है. वहीं कर्नाटक ने यह भी कहा था कि वो दिसंबर तक तमिलनाडु को पानी उपलब्ध करा सकेगा. 

मांड्या में किसानों का प्रदर्शन

इस बीच कावेरी के पानी पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद एक बार फिर कर्नाटक में तनाव के हालात हैं. पिछले बार हिंसक विरोध प्रदर्शन का केंद्र रहे मांड्या में एक बार फिर किसान सड़क पर उतर आए हैं. 

किसानों के अलावा कई कन्नड़ संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की. इस बीच विरोध को देखते हुए राजधानी बेंगलुरु समेत संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं.

'कावेरी कर्नाटक के सम्मान का मामला'

कावेरी जल विवाद कर्नाटक और तमिलनाडु में एक बड़ा सियासी मुद्दा बना हुआ है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इसी महीने कर्नाटक में बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन हुए थे. जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी. इसके साथ ही बड़े पैमाने पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था.

कावेरी हितरक्षणा समिति के अध्यक्ष जीएम गौड़ा ने कहा है, "कावेरी जल का मामला हमारे लिए सम्मान का मुद्दा है. यही वजह है कि तमिलनाडु इसे हासिल करना चाहता है."

कावेरी जल विवाद में अब तक

कावेरी जल विवाद पर तीन दिन पहले कर्नाटक विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया था. इस दौरान एक प्रस्ताव पारित करते हुए कहा गया कि पानी का उपयोग सिर्फ पेयजल की जरूरतों के लिए होगा और इसे किसी दूसरे मकसद के लिए नहीं दिया जाएगा.

सदन में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने अपने जवाब में कहा था, "यह असंभव परिस्थि‍ति पैदा हो गई है, जहां अदालती आदेश का पालन संभव नहीं है."

सुप्रीम कोर्ट ने एक हफ्ते पहले ही कर्नाटक को 27 सितंबर तक रोजाना 6 हजार क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया था. कावेरी निरीक्षण कमेटी ने पहले तीन हजार क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश जारी किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाकर दोगुना कर दिया.

कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन का आदेश

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपक मिश्र और जस्टिस उदय उमेश ललित की पीठ ने केंद्र सरकार को चार हफ्ते के अंदर कावेरी प्रबंधन बोर्ड का गठन करने और इसके गठित हो जाने की अधिसूचना के साथ अदालत को जानकारी देने का निर्देश दिया था.

कर्नाटक में इसी महीने कावेरी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन हुए थे. इस दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया.

First published: 27 September 2016, 16:16 IST
 
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