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केंद्र सरकार से SC कहा- ताजमहल का रखरखाव नहीं कर सकते तो ढहा दो..

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 July 2018, 16:12 IST
(File Photo )

ताज महल के संरक्षण और रखरखाव पर सरकारी उदासीनता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर इसको संभाल नहीं सकते तो ढहा दीजिए. सुप्रीम कोर्ट ने ताज महल के संस्थान ASI को की उदासीनता पर भी नाराजगी व्यक्त की है. बता दें कि पिछले कुछ दिनों से ताजमहल की चमक फीकी पड़ती जा रही है. जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है. कोर्ट ने ताजमहल को लेकर सरकार के रवैये पर नाराजगी जाहिर की है.

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस मदन भीमराव लोकुर ने ताज के संरक्षण और रखरखाव लेकर केंद्र सरकार और उसके संस्थान ASI के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि एक ओर फ्रांस का एफ़िल टॉवर है, जिसको देखने के लिए 80 मिलियन लोग आते है. वहीं, ताजमहल को देखने के लिए 5 मिलियन लोग ही आते हैं.

ताजमहल को लेकर न तो आप गंभीर हैं और न ही आपको इसकी परवाह है. आप टूरिस्ट को लेकर गंभीर नहीं है. आपकी वजह से ये देश का नुकसान हो रहा है, ताजमहल को लेकर घोर उदासीनता है. अगर आप इसको संभाल नहीं सकते हैं, अगर इसे संभाल नहीं सकते तो इसे ढहा दीजिये.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपको ताज को बचाने की नहीं, उसको बिगाड़ने की चिंता है. तभी आप उद्योग लगाने के लिए आवेदन मंगा रहे हैं. Taj Trapezium Authority (TTZ) में उद्योग लगाने के लिए लोग आवेदन कर रहे हैं और उनके आवेदन पर विचार भी हो रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने PHD चेंबर्स से कहा है कि Taj Trapezium Authority के तहत जो फैक्ट्री चल रही हैं. उनको आप खुद ही क्यों नबीं बंद कर देते. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने TTZ के चेयरमैन को नोटिस जारी कर सुप्रीम कोर्ट में तलब किया है. वहीं, TTZ की तरफ से कहा गया है कि वो नई फैक्ट्रियों के लिए अनुमति नहीं देगा.

आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में ताज महल के संरक्षण और रखरखाव को लेकर एक हलफनामा पेश किया था. जिसमें कहा गया था कि सरकार ने ताजमहल के विकास और संरक्षण के लिए कई योजनाएं तैयारी की हैं. जिसमें आगरा में जल जनरेटर पर पाबंदी, CNG वाहनों पर ज़ोर, प्रदूषण पर नियंत्रण और पॉलीथिन पर पाबंदी जैसे कदम भी शामिल हैं.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ताज महल में नमाज पढ़ने पर पाबंदी लगा दी थी. सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि ताज महल सात अजूबों में शामिल है, यहां नमाज नहीं पढ़ सकते हैं. नमाज किसी और जगह भी पढ़ सकते हैं.

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First published: 11 July 2018, 16:12 IST
 
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