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सुप्रीम कोर्ट ने बाहुबली और राजद नेता शहाबुद्दीन की ज़मानत रद्द की

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 September 2016, 13:28 IST

राजद नेता और सीवान के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की ज़मानत सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी है. अब उन्हें वापस जेल भेज दिया जाएगा. ज़मानत मिलने के बाद से ही शहाबुद्दीन और पटना हाईकोर्ट के इस फैसले का विरोध हो रहा था.

शहाबुद्दीन को इसी महीने की दो तारीख को सीवान के चर्चित रोशन हत्याकांड में पटना हाईकोर्ट से ज़मानत मिली थी. हालांकि रिहाई होते ही बीजेपी समेत कई दल उन पर और बिहार की मौजूदा सरकार पर हमलावर हो गए थे. फिर पटना हाईकोर्ट के इस फैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई और अब उनकी ज़मानत रद्द होने का फैसला आ गया है.

इससे पहले बहस के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार के वकील से तीखे सवाल किए थे. जस्टिस पीसी घोष और जस्टिस अमिताभ रॉय की पीठ ने पूछा कि शहाबुद्दीन की जमानत के बाद ही क्यों कोर्ट आए? जेल से बाहर आने पर ही फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की ज़रूरत क्यों महसूस हुई?

बिहार सरकार के अलावा कोर्ट चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ़ चंदाबाबू की याचिका पर भी सुनवाई कर रहा था. चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदाबाबू ने याचिका ने अपनी याचिका में कहा था कि शहाबुद्दीन के जेल से बाहर आने के बाद क्षेत्र में सनसनी और डर का माहौल बन गया है. उनकी तरफ से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने याचिका दायर की थी.

सुप्रीम कोर्ट में शहाबुद्दीन की ओर से कहा गया था कि उन्हें केस में जवाब दाखिल करने के लिए वक्त चाहिए. वह सारे सवालों का जवाब देंगे लेकिन उनके वकील राम जेठमलानी फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं.

शहाबुद्दीन को 2004 में दो भाइयों गिरीश और सतीश की हत्या के मामले में दिसंबर 2015 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. इस केस में एक मात्र गवाह और मृतकों के भाई राजीव रोशन की भी 16 जून 2014 को हत्या कर दी गई थी. इस हत्या का आरोप भी शहाबुद्दीन के ऊपर है.

'बिहार सरकार गंभीर नहीं'

सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान कहा था, 'राज्‍य सरकार ने पटना हाईकोर्ट में यह क्‍यों नहीं बताया कि शहाबुद्दीन के खिलाफ निचली अदालत में सुनवाई नहीं चल रही है. अगर किसी के खिलाफ कई मामले दर्ज हों, तो इसका मतलब यह नहीं कि एक मामले में जमानत के बाद तब तक उसे चुनौती नहीं दें, जब तक दोषी को सभी मामलों में जमानत नहीं मिल जाती.'

अदालत ने तल्ख तेवर में टिप्पणी करते हुए कहा था, 'जमानत मिलने के बाद राज्‍य सरकार क्‍या सो रही थी जो अब जागी? यह विचित्र स्थि‍ति किसने पैदा की है? बिहार सरकार मामले में गंभीर नजर नहीं आती.'

इस बीच शहाबुद्दीन की ओर से वरिष्ठ वकील रामजेठमलानी पैरवी के लिए मौजूद नहीं थे. उनकी जगह मामले को वकील शेखर नाफडे देख रहे हैं. सुनवाई के दौरान वो कोर्टरूम में मौजूद रहे.

इस मामले में पीड़ित चंद्रकेश्वर प्रसाद चंदा बाबू की ओर से वकील प्रशांत भूषण पैरवी कर रहे हैं. अपने तीन बेटों को खोने वाले चंदा बाबू ने सुप्रीम कोर्ट में शहाबुद्दीन की जमानत रद्द करने की याचिका दी है. इस बीच सीवान में चंद्रकेश्वर प्रसाद के घर के पास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है.

सीवान में दहशत का आरोप

पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से सवालिया लहजे में पूछा था कि शहाबुद्दीन मामले में ट्रायल पर रोक क्यों हैं? इसका जवाब देते हुए बिहार सरकार ने बताया था कि शहाबुद्दीन को सीवान से भागलपुर जेल ट्रांसफर किया गया है, इस वजह से ट्रायल में दिक्कतें आईं.

चंदा बाबू ने अपनी याचिका में कहा है कि शहाबुद्दीन के जेल से बाहर निकलने के बाद से सीवान में एक बार फिर दहशत का माहौल है. अपील में कहा गया है कि दो मामलों में शहाबुद्दीन को उम्रकैद की सजा और दूसरे अन्य मामलों में 30 साल की सजा हुई है. ऐसे में इस तरह के अपराधी को जमानत पर आजाद रहने का अधिकार नहीं है.

गौरतलब है कि पटना हाईकोर्ट ने विचाराधीन राजीव रोशन हत्याकांड में शहाबुद्दीन को जमानत दी है. इस फैसले को उनके पिता चंदा बाबू उर्फ चंद्रकेश्वर प्रसाद, उनकी पत्नी कलावती देवी और बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. इसी महीने शहाबुद्दीन की भागलपुर जेल से रिहाई हुई थी.

First published: 30 September 2016, 13:28 IST
 
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