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इच्छ मृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगी केंद्र से रिपोर्ट

आशीष पाण्डेय | Updated on: 10 February 2017, 1:48 IST

सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा मृत्यु (यूथनेसिया) के विषय में केंद्र सरकार को एक फरवरी तक अपनी रिपोर्ट देने का आदेश दिया है. कोर्ट ने समय सीमा तय करते केंद्र सरकार से कहा कि वह बतायें कि इस मामले पर क्या सोचते हैं और इस दिशा में क्या कर रहे हैं? 

सामाजिक संगठन कॉमन कॉज ने यूथनेशिया को वैधानिकता दिया जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. कॉमन कॉज के वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट में अपनी दलील में कहा कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को अपना ‘लिविंग विल’ बनाने हक मिलना चाहिए. ‘लिविंग विल’ के द्वारा मरीज को इस बात की आजादी होगी की वह इसको तय कर सके कि वैसी अवस्था, जहां उसके ठीक होने की उम्मीद ही नहीं हो, जबरिया लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर न रखा जाए.

हालांकि प्रशांत भूषण ने कोर्ट में कहा वह एक्टिव नहीं बल्कि पैसिव यूथनेशिया का समर्थन कर रहे हैं. जिसमें लाइलाज मरीज को वेंटिलेटर जैसे लाइफ स्पोर्ट सिस्टम से निकाल कर मृत्यु की ओर ले जाया जाता है.

जस्टिस एआर दवे की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए टिप्पणी कि अगर किसी इंसान का दिमाग काम करना बंद कर दे और मरीज वेंटिलेटर के सहारे ही जिंदा हो. उसके बचने की उम्मीद न हो तो ऐसे मामलों में क्या मरीज को इच्छा मृत्यु दी जा सकती है ? 

इस पर केंद्र सरकार के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पीएस पटवालिया ने कोर्ट को विधि आयोग की रिपोर्ट और अरुणा शानबाग केस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए बताया कि कुछ सुरक्षा उपायों के साथ इच्छा मृत्यु को मंजूरी देने की सिफारिश की गई है. जिस पर केंद्र सरकार विचार कर रही है.

पटवालिया ने इस मामले पर और विवेचनापूर्ण जवाब के लिए समय की मांग की. जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने सरकार को एक फरवरी का समय दिया. ज्ञात हो कि भारत में यूथनेसिया को कानूनी मान्याता देने के लिए लंबी बहस चल रही है. ऐसे ही मामले में 42 साल तक कोमा में रहीं नर्स अरुणा शानबाग के लिए यूथनेसिया कि मांग उठी थी.

साल 2011 में नर्स अरुणा शानबाग की पत्रकार मित्र पिंकी विराणी ने कोर्ट में एक याचिका दायर कर उनके लिए यूथनेसिया की मांग की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था.

इस मामले में मुंबई के किंग एडवर्ड मैमोरियल (केईएम) अस्पताल ने कोर्ट से कहा था कि वह अरुणा की देखभाल करने में समर्थ हैं और हम नहीं चाहते की उन्हें यूथनेसिया दी जाय.

18 मई 2015 को अरुणा की सामान्य मौत हो गई. 27 नवंबर 1973 को उसी किंग एडवर्ड मैमोरियल अस्पताल में साथी वॉर्ड ब्वाय ने बलात्कार की हिंसक कोशिश की थी, जिसके बाद अरुणा कोमा में चली गई थी.

First published: 16 January 2016, 3:07 IST
 
आशीष पाण्डेय @catchhindi

संवाददाता, कैच हिंदी. बीएचयू से पॉलिटिकल साइंस(आनर्स). जामिया मिल्लिया इस्लामिया एमसीआरसी से मॉस कॉम. मल्टी-मीडिया जर्नलिस्ट के तौर पर डिजिटल, टेलीविज़न, डॉक्यूमेंट्री, रेडियो, सोशल मीडिया कैंपेनिंग, इलेक्शन कैंपेनिंग के लिए काम कर चुके हैं.

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