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SC/ST एक्ट का दुरुपयोग रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, गिरफ्तारी से पहले हो जांंच

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 March 2018, 14:13 IST

सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति अधिनियम 1989 के तहत अपराध में नए दिशा निर्देश जारी किए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अब इस अधिनियम में तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी पहले गिरफ्तारी से पहले आरोपों की जांच की जाएगी. यही नहीं मामलों में गिरफ्तारी से पहले जमानत भी दी जा सकती है.

सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश न्यायमूर्ति आदर्श गोयल और यू यू ललित की पीठ ने कहा कि कुछ मामलों में एससी/एसटी एक्ट का दुरुपयोग पाया गया है. इसी को देखते हुए किसी भी पब्लिक सर्वेंट पर केस दर्ज करने से पहले DSP स्तर का पुलिस अधिकारी प्रारंभिक जांच करेगा. इसके अलावा किसी सरकारी अफसर की गिरफ्तारी से पहले उसके उच्चाधिकारी से अनुमति जरूरी होगी.

 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून के कड़े प्रावधानों के तहत दर्ज केस में सरकारी कर्मचारियों को अग्रिम जमानत देने के लिए कोई बाधा नहीं होगी. महाराष्ट्र की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का ये अहम फैसला आया है.

जानिए क्या है एससी-एसटी एक्ट?

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनियम, 2015 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ हो रहे अत्याचार की रोकथाम के लिए है. इस अधिनियम में कठोर प्रावधानों को सुनिश्चित किया गया है. यह अधिनियम प्रधान अधिनियम में एक संशोधन है और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) (पीओए) अधिनियम,1989 के साथ संशोधन प्रभावों के साथ लागू किया गया है.

 

अधिनियम के तहत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के विरुद्ध किए जाने वाले नए अपराधों में समुदाय के लोगों को जूते की माला पहनाना, उन्हें सिंचाई सुविधाओं तक जाने से रोकना या वन अधिकारों से वंचित रखना, जाति सूचक गाली देना,जादू-टोना अत्याचार को बढ़ावा देना, सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार करना, चुनाव लड़ने में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकना, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की महिलाओं को वस्त्र हरण कर आहत करना, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के किसी सदस्य को घर, गांव और आवास छोड़ने के लिए बाध्य करना, मानव और पशु नरकंकाल को निपटाने और लाने-ले जाने के लिए तथा बाध्य करना, कब्र खोदने के लिए बाध्य करना, सिर पर मैला ढोने की प्रथा का उपयोग और अनुमति देना,अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की महिलाओं को देवदासी के रूप में समर्पित करना, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के धार्मिक भावनाअों को ठेस पहुंचाना, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सदस्य के विरुद्ध यौन दुर्व्यवहार करना, यौन दुर्व्यवहार भाव से उन्हें छूना और भाषा का उपयोग करना है.

First published: 20 March 2018, 14:13 IST
 
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