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सुप्रीम कोर्ट: पिता की संपत्ति में बेटी का भी हक

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 April 2016, 18:15 IST

सुप्रीम कोर्ट ने आज पिता की संपत्ति में बेटियों के हक के मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि एक इंसान मरने के बाद ऑपरेटिव सोसायटी का फ्लैट अपनी पत्नी और बेटे के नाम पर करने की बजाए अपनी शादीशुदा बेटी को भी दे सकता है.

पश्चिम बंगाल कोऑपरेटिव सोसाइटी रूल्‍स 1987 के मुताबिक कोऑपरेटिव सोसाइटी के फ्लैट का मालिक अपने घर के किसी भी सदस्‍य को नॉमिनेट कर सकता है.कोर्ट ने ये फैसला बिस्वा रंजन सेनगुप्ता के मामले में दिया. 

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रंजन ने अपनी शादीशुदा बेटी इंद्राणी वाही को कोलकाता के साल्टलेक सिटी में पूर्वांचल हाउसिंग स्टेट की मैनेजिंग कमेटी के फ्लैट का मालिकाना हक दिया था.

जिस पर उनके बेटे और पत्नी ने आपत्ति जताते हुए कोर्ट में चुनौती दी थी. सोसायटी के रजिस्ट्रार ने रंजन की बेटी का नाम उत्तराधिकारी के रुप में दर्ज करने से इनकार कर दिया. 

शादीशुदा बेटी को मिलेगा फ्लैट


अपनी पत्नी और बेटे के दुर्व्यवहार की वजह से रंजन अपनी बेटी के साथ रह रहे थे. इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने इंद्राणी के नाम की इजाजत दे दी थी.

लेकिन हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि इंद्राणी चूंकि सेनगुप्‍ता की पत्‍नी और बेटे के साथ प्रॉपर्टी के शेयरहोल्‍डर की हिस्‍सेदार हैं, तो अन्‍य शेयरहोल्‍डर्स की सहमति के साथ ही प्रॉपर्टी को वो अपने अधिकार में कर सकती हैं.

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इंद्राणी ने सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील की. कोर्ट के आदेश के बाद कोऑपरेटिव सोसायटी के पास कोई रास्ता नहीं बचा.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रंजन की पत्नी और उनके बेटे उत्तराधिकारी बनने के मामले में दूसरे फोरम में जा सकते हैं.

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First published: 21 April 2016, 18:15 IST
 
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