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आज से 3 साल पहले सुप्रीम कोर्ट में पहली बार हुई थी मिडनाइट सुनवाई की शुरुआत

हेमराज सिंह चौहान | Updated on: 17 May 2018, 8:52 IST
(File Photo)

बुधवार रात सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर से इतिहास दोहराया गया. कांग्रेस-जेडीएस की याचिका पर सुनवाई करने के लिए आधी रात को कोर्ट का दरवाजा खोला गया. दरअसल कर्नाटक में भाजपा के नेता बीएस येदियुरप्पा के गुरुवार सुबह 9 बजे सीएम पद के शपथ ग्रहण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई.

इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों ने आधी रात को सुनवाई की. इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एसए बोबड़े और जस्टिस अशोक भूषण की तीन जजों की बेंच ने की. जजों ने याचिका पर सुनवाई करते हुए भाजपा के नेता बीएस येदियुरप्पा के गुरुवार को होने वाली शपथ ग्रहण समारोह पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. इसके साथ ही कोर्ट ने कांग्रेस से कहा कि वो राज्यपाल के फैसले पर दखल नहीं दे सकते हैं. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए येदियुरप्पा से विधायकों की लिस्ट मांगी जो उन्हें समर्थन दे रहे हैं. 

 

 

तीन साल पहले SC में पहली बार आधी रात को हुई थी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में आज से 3 साल पहले याकूब मेनन की फांसी को लेकर आधी रात को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी. ये तीन जजों की बैंच ने की थी. इसमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा भी एक जज थे. ये मामला मुंबई बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन की फांसी को लेकर था.

29 जुलाई 2015 को याकूब मेमन की फांसी पर रोक लगाने वाली याचिका की सुनवाई के लिए पहली बार आधी रात को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने आधी रात को सुनवाई करने का ऐतिहासिक फैसला लिया था. ये याचिका जाने माने वकील प्रशांत भूषण समेत 12 लोगों ने दाखिल की थी.

 

याकूब को दी जाने वाली फांसी से ठीक पहले आधी रात को प्रशांत भूषण समेत 12 वकील चीफ जस्टिस के घर पहुंचे. उन्होंने तत्कालीन चीफ जस्टिस एच एल दत्तू ने याकूब की फांसी पर रोक लगाने की अपील की. इसके बाद एच एल दत्तू  ने देश के वर्तमान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई में तीन जजों की बेंच गठित की.

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इतिहास बनाते हुए देर रात को ही कोर्ट के दरवाजे खुलवाकर अदालत लगाई.  इसके बाद इस मामले की सुनवाई शुरू हुई, जो करीब 90 मिनट तक चली. सभी पक्षों को सुनने के बाद तीन जजों की बेंच ने याकूब मेमन  की फांसी की सजा पर रोक हटाने से इनकार कर दिया और फांसी की सजा को बरकरार रखा.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कुछ घंटो के अंदर मुंबई हमले के दोषी को फांसी पर लटका दिया. लेकिन कोर्ट ने इस मामले मेें देर रात सुनवाई करने का फैसला लेकर कोर्ट का गौरव और सम्मान बढ़ा दिया.

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First published: 17 May 2018, 8:52 IST
 
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