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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला- अगर बदला बयान तो रेप पीड़िता के खिलाफ भी चलेगा मुकदमा

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 September 2018, 8:40 IST

सुप्रीम कोर्ट ने रेप के एक 14 साल पुराने मामले में अहम फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर आरोपी को बचाने के लिए पीड़ित ने कोई समझौता किया या फिर अपने बयान को बदला तो पीड़िता के खिलाफ भी मुकदमा चल सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया कि अगर आरोपी के खिलाफ उसका अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं तो और रेप पीड़िता आरोपी को बचाने के लिए अपने बयान से पलट जाती है तो उसके खिलाफ भी मुकदमा चलाया जाएगा.

इस मामले में जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस नवीन सिन्हा और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने कहा, ''अगर रेप के आरोपी को पीड़िता द्वारा मेडिकल रिपोर्ट के अलावा अन्य किसी भी आधार पर क्लीन चिट भी दे दी जाती है, तब भी उसके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है.'' कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में रेप के दोषी को 10 साल की सजा सुनाई है जबकि इस मामले में रेप पीड़िता अपने बयान से पलट गई थी. उसके बयान बदलते हुए कहा कि उसके साथ रेप हुआ ही नहीं.


इस मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, 'क्रिमिनल ट्रायल का मकसद सच सामने लाना है. पूछताछ कैसी हो यह हर केस और उसके तथ्यों पर निर्भर करते है. किसी को निर्दोष मानने और पीड़िता के हक के बीच संतुलन जरूरी है. आरोपी या पीड़ित किसी को यह अनुमित नहीं है कि वह झूठ बोलकर क्रिमिनल ट्रायल को पलट दे और कोर्ट को मजाक का विषय बनाए. किसी को भी यह अनुमति नहीं होगी कि वह अपने बयान को पूरी तरह पलटते हुए मुकर जाए और क्रिमिनल ट्रायल या न्याय व्यवस्था का मजाक बनाए.'

ये मामला 14 साल पुराने केस की सुनवाई में सामने आया. 2004 के इस रेप मामले में पीड़िता उस वक़्त मात्र नौ साल की थी और रेप की शिकायत उसकी मां द्वारा की गई थी. इस मामले में पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट और आरोपी की पहचान के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था. लेकिन छह छह महीने बाद कोर्ट के सामने पीड़िता अपने बयान से पलट गई. ऐसे में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया.

हालांकि, गुजरात हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया और रेप पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूतों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया. इस पर दोषी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की लेकिन याचिका को खारिज कर दिया गया.

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बयान बदलने के लिए प्रभावित कर सकता है आरोपी
इस मामले में सबूतों को देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'पीड़िता का परिवार गरीब था और वह उसके कुल पांच भाई-बहन हैं. रेप उस समय हुआ जब वह भैंस चराने गई थी. छह महीने बाद रेप पीड़िता ने अपना बयान बदल दिया. ऐसे में हमारा भी मानना है कि गुजरात हाई कोर्ट ने जो तर्क दिए हैं कि आरोपी ने कैसे भी करके पीड़िता को बयान पलटने पर मजबूर किया होगा, सही हैं.'

बेंच ने आगे कहा, 'अगर कोई पीड़ित/पीड़िता न्यायिक प्रक्रिया को पलट देने के लिए अपना बयान बदल देता है तो कोर्ट चुप नहीं बैठेगा. सच सामने लाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा. सबूत होने के बावजूद किसी के दबाव के चलते बयान बदलना स्वीकार्य नहीं होगा. पीड़िता द्वारा बयान बदलने के चलते उसके खिलाफ केस चलाए जाने के लिए यह मामला एकदम उपयुक्त है लेकिन क्योंकि यह मामला 14 साल पुराना है इसलिए उन्हें छोड़ा जा रहा है.'

First published: 30 September 2018, 8:41 IST
 
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