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सजायाफ्ता सांसदों-विधायकों की सदस्यता न रद्द होने पर चुनाव आयोग से जवाब तलब

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 July 2016, 13:30 IST

सुप्रीम कोर्ट ने सजायाफ्ता जनप्रतिनिधियों की सदस्यता तुरंत न रद्द होने पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है. दो साल से ज्यादा की सजा पाने वाले सांसदों और विधायकों की सदस्यता रद्द न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है.

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को जवाब देने के लिए चार हफ्ते का वक्त दिया है. याचिकाकर्ता एनजीओ लोक प्रहरी ने कहा है कि 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम फैसले में ऐसे जनप्रतिनिधियों को तुरंत अयोग्य करार देने का आदेश दिया था.

एनजीओ ने जनहित याचिका में कहा, "चुनाव आयोग विधानसभा सचिवालय से रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई करता है. जबकि विधानसभा सचिवालय की तरफ से अक्सर रिपोर्ट भेजने में देरी की जाती है."

गौरतलब है कि 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अगर किसी जनप्रतिनिधि को 2 साल से ज्यादा की सजा होती है तो उसकी सदस्यता रद्द होगी.

याचिका में उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री कैलाश चौरसिया के मामले का भी हवाला दिया गया है. कैलाश चौरसिया को एक मामले में तीन साल की सजा मिली थी, लेकिन उन्हें सदस्यता से अयोग्य करार देने में काफी समय लगा था.

First published: 22 July 2016, 13:30 IST
 
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