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अब दहेज प्रताड़ना के मामले में तत्काल होगी पति की गिरफ्तारी, सुप्रीम कोर्ट ने बदला पुराना फैसला

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 September 2018, 13:03 IST
(file photo )

सुप्रीम कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना के मामले में पति और उसके परिवार की तत्काल गिरफ्तारी पर लगी रोक को हटा दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले फैसले को बदल दिया है जिसमें कहा गया था कि दहेज प्रताड़ना के मामले में पति और उसके परिवार की तत्काल गिरफ्तारी नहीं की जा सकती है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पीड़िता की सुरक्षा के लिए पति और उसके परिवार की गिरफ्तारी को लेकर दिया गया सेफगार्ड हटाना जरूरी है.  ऐसे मामलों से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए परिवार कल्याण कमेटी की जरूरत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने पति और उसके परिवार की गिरफ्तारी को लेकर दिए गए सेफगार्ड पर असहमति जताई है.

मीडिया खबरों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दहेज प्रताड़ना के मामलों में पति और उसके परिवार की तत्काल गिरफ्तारी पर लगी रोक को लेकर दिए गए सेफगार्ड पर असहमति जताई है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई में तीन जजों की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि हम दहेज प्रताड़ना मामले में दिए फैसले में जो सेफगार्ड दिया गया है उससे वह सहमत नहीं हैं.

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में दो जजों की बेंच ने पिछले साल फैसला सुनाते हुए कहा था कि दहेज प्रताड़ना के केस में सीधे गिरफ्तारी नहीं होगी. इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने फिर से विचार करने का फैसला किया. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई ने इस मामले मामले में सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. शुक्रवार को इस मामले में अपना फैसला सुना दिया है.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में दो जजों की बेंच ने 27 जुलाई 2017 को दहेज प्रताड़ना के मामले में फैसला सुनाते हुए कहा था कि ऐसे मामलों में पति की सीधे गिरफ्तारी नहीं होगी. ऐसे मामलों को देखने के लिए हर जिले में एक परिवार कल्याण समिति का गठन किया जाए. समिति ऐसे मामलों पर जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. उसके बाद ही गिरफ्तारी की जाए. सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसले में दहेज प्रताड़ना से जुड़े कानून के दुरुपयोग को लेकर चिंता जाहिर की थी.

इसके बाद अक्टूबर 2017 को इस फैसले को लेकर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने असहमति जताई. दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने 13 अक्टूबर 2017 को अपना फैसला सुनाते हुए कहा था कि दहेज प्रताड़ना से जुड़े मामलों को लेकर 27 जुलाई को जो आदेश पारित किया गया है हम उससे सहमत नहीं है. बेंच ने कहा था कि हम कानून नहीं बना सकते हैं बल्कि उसकी व्याख्या कर सकते हैं.

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First published: 14 September 2018, 12:59 IST
 
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