Home » इंडिया » supreme court: on driving talking on phone is punishable offence for 2 years
 

सुप्रीम कोर्ट: गाड़ी चलाते समय मोबाइल पर बात करने वालों को हो 2 साल की सजा और जुर्माना

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2017, 5:47 IST
(एजेंसी)

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि गाड़ी चलाते समय मोबाइल पर बात करने वालों को कड़ी सजा दिए जाने की जरूरत है.

कोर्ट ने मामले को गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार से कहा कि इसे रोकने के लिए कड़े कानून बनाने की जरूरत है तो उसे इस दिशा में कदम उठाना चाहिए, क्योंकि ऐसे लोग न केवल सड़क पर तेज रफ्तार और रोमांच के साथ कॉम्पीटिशन करते हैं, बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की जिंदगी को भी खतरे में डालते हैं.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक मिश्रा के इन सुझावों पर अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने भी सहमति जताते हुए कहा कि खतरनाक ड्राइविंग करने वालों के लिए मौजूदा मोटर व्हीकल एक्ट में कम सजा का प्रावधान है, जिसे संशोधित कर बढ़ाया जाना चाहिए. जस्टिस मिश्रा की बेंच लापरवाह ड्राइविंग के एक मामले की सुनवाई कर रही थी.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में दोषियों को जुर्माने के साथ दो साल से ज्यादा की सजा दी जानी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि अब यह समय की जरूरत बन चुकी है कि मोटर व्हीकल एक्ट में सजा के प्रावधानों में संशोधन हो.

इसके साथ ही कोर्ट ने कहा, "कई ऐसे लोग हैं जो रोमांच के लिए गाड़ी को उंगलियों पर नचाते हैं. ऐसे लोग अन्य लोगों की जिंदगी की परवाह कतई नहीं करते हैं."

कोर्ट ने यह भी कहा, "देश में गाड़ियों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है इसलिए लोग सड़कों पर ही स्पीड की रेस करने लगते हैं."

अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने बेंच की टिप्पणी पर सहमति जताते हुए कहा कि लापरवाह ड्राइविंग से हुई मौत के मामले में कठोरता से निपटने की जरूरत है.

लेकिन उन्होंने यह मुद्दा भी उठाया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 304ए की वजह से यह संभव नहीं है क्योंकि लापरवाही से ड्राइविंग के केस में हुई मौत पर इस कानून के तहत दो साल की सजा का ही प्रावधान है. रोहतगी ने कोर्ट से कहा कि इसमें संशोधन की जरूरत है.

कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि आप यह सुनिश्चित कराएं कि किसी व्यक्ति की सनक, फैन्टेसी और दु:साहस का खामियाजा किसी मासूम को न भुगतना पड़े.

कोर्ट ने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि ऐसे मामलों में कुछ लोगों पर मोटर कानून की धारा 184 के तहत आरोप लगाए जाते हैं. इससे गुनहगार को कम से कम सजा मिल पाती है.

इस धारा के तहत पहले अपराध पर अधिकतम 6 महीने की जेल या 1000 रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकता है, जो बहुत कम है. वहीं दूसरी बार इस तरह के अपराध करने पर दो साल की सजा या 2000 रुपये का जुर्माना हो सकता है.

First published: 22 September 2016, 3:10 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी