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सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न एक्ट के दुरुपयोग पर दिया बड़ा फैसला

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 July 2017, 11:48 IST

दहेज उत्पीड़न के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने आदेश दिया कि, दहेज प्रताड़ना यानी आईपीसी की धारा-498 ए के मामले में अब सीधे गिरफ्तारी नहीं होगी. कोर्ट ने ये भी आदेश दिया कि दहेज प्रताड़ना मामले को देखने के लिए हर जिले में एक परिवार कल्याण समिति बनाई जाए और समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही गिरफ्तारी होनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह चिंता की बात है कि विवाहिताओं द्वारा धारा 498ए के तहत बड़ी संख्या में मामले दर्ज कराए जा रहे हैं. उन्होंने दहेज प्रताड़ना मामले में कानून के दुरुपयोग पर चिंता जाहिर की है और लीगल सर्विस अथॉरिटी से कहा है कि प्रत्येक जिले में परिवार कल्याण समिति का गठन किया जाए, जिसमें सिविल सोसायटी के लोग भी शामिल हों.

जांच प्रभावित होने के सबूत पर हो अरेस्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जिन किन्हीं मामलों में 7 साल तक की सजा हो सकती है, उनमें गिरफ्तारी सिर्फ इस कयास के आधार पर नहीं की जा सकती कि आरोपी ने वह अपराध किया होगा. गिरफ्तारी तभी की जाए, जब इस बात के पर्याप्त सबूत हों कि आरोपी के आजाद रहने से मामले की जांच प्रभावित हो सकती है, वह कोई और क्राइम कर सकता है या फरार हो सकता है. 

इन मामलों में होगी सीधे गिरफ्तारी

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके गोयल और जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने कहा है कि अगर महिला जख्मी है या फिर उसकी प्रताड़ना की वजह से मौत हो जाती है तो फिर वो केस इस गाइडलाइन के दायरे से बाहर होगा और ऐसे मामले में गिरफ्तारी पर कोई रोक नहीं होगी.

क्या था मामला?

उत्तर प्रदेश के एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये गाइडलाइन बनाने के निर्देश दिए हैं. जस्टिस एके गोयल और जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने कहा है कि धारा 498ए को कानून में रखने का (1983 संशोधन) मकसद पत्नी को पति या उसके परिजनों के हाथों होने वाले अत्याचार से बचाना था. वो भी तब जब ऐसी प्रताड़ना के कारण पत्नी के आत्महत्या करने की आशंका हो.

First published: 28 July 2017, 11:35 IST
 
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