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SC ने इच्छामृत्यु को दी इजाजत, कहा- हर किसी को सम्मान से मरने का अधिकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 March 2018, 11:55 IST

इच्छामृत्यु को लेकर देश भर में छिड़ी बहस पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने इच्छामृत्यु की मांग पर मुहर लगा दी है. कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ इसकी इजाजत दे दी है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि देश में हर किसी को सम्मान के साथ मरने का अधिकार है.

देश के चीफ जस्टिस सहित 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने ये ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. कानून बनने तक सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन जारी रहेगी. कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि जीने के अधिकार में मरने का अधिकार भी शामिल है. बता दें कि देश के संविधान हर किसी को ये अधिकार प्राप्त है. सुप्रीम कोर्ट ने मरणासन्न व्यक्ति द्वारा इच्छामृत्यु के लिए लिखी गई वसीयत (लिविंग विल) को मान्यता देने की मांग वाली याचिका पर फैसला सुनाया है.

सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कुछ दिशा-निर्देशों के साथ इसकी इजाजत दी जा सकती है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा था कि हम ये देखेंगे कि इच्छामृत्यु में यानी इच्छामृत्यु के लिए वसीहत मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज हो जिसमें दो स्वतंत्र गवाह भी हों. कोर्ट इस मामले में पर्याप्त सेफगार्ड देगा. इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने ये भी सवाल उठाया था कि क्या सम्मान से जीन के अधिकार को माना जाता है तो क्यों न सम्मान के साथ मरने को भी माना जाए.

 

क्या है इच्छा मृत्यु
‘लिविंग विल’ एक लिखित दस्तावेज होता है जिसमें कोई मरीज पहले से यह निर्देश देता है कि मरणासन्न स्थिति में पहुंचने या रजामंदी नहीं दे पाने की स्थिति में पहुंचने पर उसे किस तरह का इलाज दिया जाए.

‘पैसिव यूथेनेशिया’ (इच्छामृत्यु) वह स्थिति है जब किसी मरणासन्न मरीज की मौत की तरफ बढ़ाने की मंशा से उसे इलाज देना बंद कर दिया जाता है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने पिछले साल 11 अक्तूबर को इस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था.

First published: 9 March 2018, 11:55 IST
 
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