Home » इंडिया » Supreme Court quashes order by Arunachal Governor, says restore status quo as of Dec 15, 2015 in Arunachal Pradesh
 

सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को झटका, अरुणाचल में बोलेगी तुकी की तूती

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 July 2016, 13:00 IST
(फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार को बहाल करने का आदेश दिया है. उत्तराखंड के बाद मोदी सरकार के लिए यह एक और बड़ा झटका है.

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल ज्योति प्रसाद राजखोवा के आदेश को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि नबाम तुकी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार बहाल हो.

'15 दिसंबर 2015 की स्थिति बहाल हो'

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि विधानसभा का सत्र पहले बुलाना और स्पीकर को हटाने की राज्यपाल की कार्रवाई असंवैधानिक है.

सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर 2015 की स्थिति बहाल करने का आदेश दिया है. उस वक्त नबाम तुकी अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री थे.

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'अदालत का फैसला ऐतिहासिक'

कांग्रेस की तरफ से मामले की पैरवी करने वाले वकील और राज्यसभा सांसद विवेक तनखा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश ऐतिहासिक है. साथ ही तनखा ने बताया कि अदालत ने नौ दिसंबर के नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया है.

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सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर के बाद के सारे फैसले निष्प्रभावी करार देते हुए नबाम तुकी सरकार को बहाल करने का आदेश दिया है. इससे पहले उत्तराखंड में भी केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से मुंह की खानी पड़ी थी.

फैसले के बारे में जानकारी देते हुए विवेक तनखा ने कहा कि 16 और 17 दिसंबर को राज्यपाल ने विधानसभा का जो सत्र बुलाया था, उसे असंवैधानिक करार दिया है.

'देश के संविधान की हुई रक्षा'

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी ने कहा, "हमें सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिला है. अदालत ने आज इस देश और इसके संविधान को बचा लिया है."

साथ ही नबाम तुकी ने कहा, "यह एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व फैसला है, जिसकी इस देश के लोग अपेक्षा कर रहे थे."

तुकी ने साथ ही कहा कि हम पार्टी विधायकों के साथ चर्चा करके आगे की कार्रवाई करेंगे. जो भी वैधानिक तौर पर जरूरी होगा, वो हम लोग करेंगे.

वहीं कांग्रेस की लीगल सेल के प्रमुख केसी मित्तल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्यपाल केंद्र सरकार के एजेंट के तौर पर काम नहीं कर सकेंगे.

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उत्तराखंड में भी लगा था झटका

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में बहुमत परीक्षण का आदेश देते हुए हरीश रावत को मौका दिया था. 27 मार्च को उत्तराखंड में केंद्र सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था. 10 मई को बहुमत परीक्षण के दौरान दो घंटे के लिए राष्ट्रपति शासन हटा दिया गया था.

सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में बहुमत परीक्षण की रिपोर्ट पेश की गई, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हरीश रावत को मुख्यमंत्री का पदभार संभालने का आदेश दिया. इसी दिन अदालत के आदेश के बाद राष्ट्रपति शासन को हटा लिया गया था.  

First published: 13 July 2016, 13:00 IST
 
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