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मोबाइल को आधार से जोड़ने की अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को किया तलब

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 April 2018, 8:23 IST

आधार को मोबाइल नंबर से अनिवार्य रूप से जोड़ने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के फैसले पर सवाल किया है. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि उपयोगकर्ताओं के अनिवार्य सत्यापन पर उसके पिछले आदेश को 'औजार' के रूप में प्रयोग किया गया.

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि ‘ लोकनीति फाउंडेशन ’ द्वारा दायर जनहित याचिका पर उसके आदेश में कहा गया था कि मोबाइल के उपयोगकर्ताओं को राष्ट्र सुरक्षा के हित में सत्यापन की जरूरत है.

यह पीठ आधार और इसके 2016 के एक कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. पीठ ने कहा, 'असल में उच्चतम न्यायालय ने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया लेकिन आपने इसे मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए आधार अनिवार्य करने के लिए औजार के रूप में प्रयोग किया.'

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भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ( यूआईडीएआई ) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि दूरसंचार विभाग की अधिसूचना ई केवाईसी प्रक्रिया के प्रयोग से मोबाइल फोनों के पुन : सत्यापन की बात करती है और टेलीग्राफ कानून सेवाप्रदाताओं की 'लाइसेंस स्थितियों पर फैसले के लिए केन्द्र सरकार को विशेष शक्तियां' देता है.

पीठ ने कहा , 'आप ( दूरसंचार विभाग ) सेवा प्राप्त करने वालों के लिए मोबाइल फोन से आधार को जोड़ने के लिए शर्त कैसे लगा सकते हैं ?'’ पीठ ने कहा कि लाइसेंस समझौता सरकार और सेवा प्रदाताओं के बीच है. यूआईडीएआई के वकील द्विवेदी ने कहा कि आधार योजना का लगातार दो सरकारों ने समर्थन था.

First published: 26 April 2018, 8:23 IST
 
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