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इंदिरा जय सिंह की SC में इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति को रोकने की मांग खारिज, CJI बोले- ये अकल्पनीय

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 April 2018, 18:15 IST

सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. एक तरफ जस्टिस केएम जोसेफ की सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर नियुक्ति ना होने का मामले को लेकर कांग्रेस मोदी सरकार पर हमला बोल रही है. वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में इंदु मल्होत्रा की जज के रूप में नियुक्ति के वांरट पर रोक लगाने की मांग करने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है. जनहित याचिका बार एसोसिएशन के 100 वकीलों द्वारा दाखिल की थी. जिसका पक्ष कोर्ट में इंदिरा जयसिंह ने रखा.

सुप्रीम कोर्ट ने इंदु मल्होत्रा की जज के रूप में नियुक्ति पर रोक लगाने से मना करते हुए याचिका को खारिज कर दिया है. हालांकि इस दौरान इस दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और इंदिरा जयसिंह के बीच तीखी बहस देखने को मिली.

इंदिरा जय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में मांग करते हुए कहा कि जस्टिस जोसफ का नाम क्लियर होने तक इंदु मल्होत्रा की जज के रूप में नियुक्ति पर रोक लगाई दी जाए. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि जब आप सुबह कठुआ मामला लेकर आईं तो लगा कि आप ऐसे गंभीर मामलों को लेकर चिंतित हैं, लेकिन अब आप इंदु मल्होत्रा की जज के रूप में नियुक्ति पर रोक लगाने की बात कर रही हैं.

आपके बीच की एक महिला जज बन रही है और इसको रोकने के लिए कह रही हैं. इंदिरा जय सिंह ने कहा कि वो इंदु मल्होत्रा की जज के रूप में नियुक्ति के खिलाफ नहीं है. हम चाहते हैं कि जज जोसेफ की नियुक्ति क्लियर होने तक इस पर रोक लगा दी जाए.

इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि आप क्या चाहती हैं कि 30 नामों की सिफारिश में से अगर सरकार ने एक नाम क्लियर नहीं किया है, तो क्या सभी की नियुक्ति को रोक दिया जाए. चीफ जस्टिस ने कहा कि सरकार के पास किसी भी सिफारिश को वापस भेजने का अधिकार है.

सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा जय सिंह की याचिका को अकल्पनीय, सोच से बाहर और कभी नहीं सुनी नहीं गई करार देते हुए खारिज कर दिया है. आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के करीब 100 वकीलों ने याचिका दाखिल कर इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति वाले वारंट को रद्द करने की मांग की थी.

कांग्रेस बीजेपी आमने सामने

जजों की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस और बीजेपी आमने सामने आ गई हैं. जहां कांग्रेस ने जज जोसेफ की नियुक्ति को रोके जाने को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है. कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि कानून के अनुसार सरकार को कॉलेजियम के अनुसार ही कार्य करना होता है. लेकिन सरकार इसको अपने अनुसार करना चाहती है.

सरकार चाहती है कि सबकुछ उनके अनुसार हो. इसके लिए सरकार कॉलेजियम की सिफारिशों को नजरअंदारज करेगी. उसको मंजूरी नहीं देगी. सिब्बल ने कहा कि पहली बार एक प्रैक्टिसिंग महिला अधिवक्ता को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया जा रहा है. इसके लिए हम सरकार को बधाई देते हैं. हम पहले से कहते आ रहे हैं कि न्यायपालिका खतरे में है.

वहीं केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि 'कांग्रेस पार्टी के पास कोई नैतिक अधिकार नहीं है, जिसके आधार पर वो न्यायपालिका की गरिमा के बारे में सवाल करे. कांग्रेस पार्टी का पूरा रिकॉर्ड ही भरा पड़ा है कि कैसे न्यायापालिका से समझौता किया जाए.

First published: 26 April 2018, 18:15 IST
 
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