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सुप्रीम कोर्ट: जस्टिस रंजन गोगोई और पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू के बीच तीखी बहस

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 November 2016, 12:00 IST
(एजेंसी)

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सौम्या रेप केस के मामले में अवमानना नोटिस पर पेश हुए पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू की इस केस की सुनवाई कर रहे जज रंजन गोगोई से तीखी बहस हो गई.

जस्टिस काटजू इस मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच के सामने पेश हुए थे. इस दौरान पीठ के सामने काटजू ने अपनी दलील रखी, जिसके बाद उनकी जस्टिस गोगोई से तीखी झड़प हुई.

जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस पी सी घोष और जस्टिस उदय यू ललित की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि ब्लॉग पर जस्टिस काटजू का बयान जजों और पूरी न्यापालिका पर गंभीर हमले जैसा है.

'मुझे धमकी मत दीजिए'

जस्टिस काटजू ने इस फैसले की प्रतिक्रिया में कहा कि कोर्ट में जज उन्हें धमकी दे रहे हैं और यह उनके लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज के साथ इस तरह का व्यवहार सर्वथा गलत है.

जस्टिस गोगोई ने कोर्ट में जैसे ही अपना फैसला सुनाया तो जस्टिस काटजू ने कहा, "मैं इससे डरता नहीं हूं. मुझे धमकी मत दीजिये."

'कोई है, जो काटजू को बाहर ले जाए'

इस पर जस्टिस गोगोई ने जस्टिस काटजू से कहा, "मुझे और अधिक उकसाइए नहीं." इस पर जस्टिस काटजू ने कहा, "आप इस तरह की धमकी देकर मुझे भड़का रहे हैं. आपने मुझे यहां आने और आपकी मदद करने का अनुरोध किया था."

इसके बाद जस्टिस गोगोई ने कहा, "क्या यहां पर कोई है, जो जस्टिस काटजू को बाहर ले जाए."

जैसे ही जस्टिस गोगोई ने यह कहा जस्टिस काटजू ने पलट कर जवाब दिया, "यह आपका कैसा आचरण है. आपके अनुरोध पर ही मैं यहां आया था. क्या मुझसे पेश आने का यही तरीका है."

काटजू को अवमानना नोटिस

इसके बावजूद खंडपीठ ने अपना आदेश लिखना जारी रखा और कहा कि पहली नजर में जस्टिस काटजू का बयान का जजों पर गंभीर हमला है, इसलिए उन्हें अवमानना का नोटिस दिया जा रहा है.

सौम्या हत्याकांड में आरोपियों को हत्या के आरोप से बरी करने के फैसले के खिलाफ केरल सरकार और मृतक की मां की पुनर्विचार याचिका खारिज किये जाने के बाद अवमानना का मसला उठा.

हत्या केस में बरी होने पर ब्लॉग 

दरअसल जस्टिस काटजू को सुप्रीम कोर्ट ने तलब किया था क्योंकि उन्होंने अपने ब्लॉग में दावा किया था कि सौम्या हत्याकांड के आरोपियों को बरी करने के फैसले में कई खामियां हैं और उनसे पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान खंडपीठ की मदद का अनुरोध किया गया था.

गौरतलब है कि पिछले महीने ही सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस काटजू से 11 नवंबर को अवमानना के मामले में उपस्थित होने और इस फैसले की आलोचना करने संबंधी उनकी फेसबुक पोस्ट पर बहस के लिये कहा था जिसकी वजह से सौम्या बलात्कार मामले के आरोपी फांसी के फंदे से बच गए थे.

First published: 12 November 2016, 12:00 IST
 
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