Home » इंडिया » Supreme Court's nine judge bench gives verdict Right To Privacy as a fundamental right.
 

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, राइट टू प्राइवेसी है मौलिक अधिकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 August 2017, 11:27 IST

सुप्रीम कोर्ट ने निजता के अधिकार पर गुरुवार को फैसला सुना दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजता का अधिकार एक मौलिक अधिकार है. इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि यह संविधान के आर्टिकल 21 (जीने के अधिकार) के तहत आता है. 

 

सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संवैधानिक बेंच ने सर्वसम्मति से यह फैसला दिया है. हालांकि, अपने ताजा फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि निजता का अधिकार कुछ तर्कपूर्ण रोक के साथ ही मौलिक अधिकार है. कोर्ट के मुताबिक, हर मौलिक अधिकार में तर्कपूर्ण रोक होते ही हैं, जीवन का अधिकार भी पूर्ण नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संवैधानिक बेंच ने 1954 में 8 जजों की संवैधानिक बेंच की एमपी शर्मा केस और 1961 में 6 जजों की बेंच के खड्ग सिंह केस में दिए फैसले को पलट दिया. इस फैसले के बाद अब लोगों की निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं होगी. हालांकि आधार को योजनाओं से जोड़ने पर सुनवाई आधार बेंच करेगी. इसमें 5 जज होंगे.

गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है, जिस पर भी गुरुवार को फैसला आना है. सर्वोच्च न्यायालय की नौ न्यायाधीशों प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे. एस. खेहर, न्यायमूर्ति जे. चेलामेश्वर, न्यायमूर्ति एस. ए. बोबडे, न्यायमूर्ति आर. के. अग्रवाल, न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन, न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे, न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर वाली संविधान पीठ ने दो सप्ताह की सुनवाई के बाद दो अगस्त को मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था. मामले पर सुनवाई 19 जुलाई को शुरू हुई थी और दो अगस्त को संपन्न हुई.

कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित महाराष्ट्र और गुजरात ने जहां निजता के अधिकार को मूल अधिकार नहीं माना है, वहीं कांग्रेस शासित कर्नाटक, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, पुदुचेरी और तृणमूल कांग्रेस शासित पश्चिम बंगाल का कहना है कि निजता का अधिकार मूल अधिकार है.

आधार योजना की शीर्ष नियामक संस्था भारतीय विशेष पहचान प्राधिकरण ने भी कहा है कि निजता का अधिकार मूल अधिकार नहीं है और नागरिकों से एकत्रित उनके निजी डेटा की सुरक्षा के पर्याप्त उपाय मौजूद हैं.

First published: 24 August 2017, 11:27 IST
 
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