Home » इंडिया » Supreme court says boss is not guilty if any staff ends life due to heavy workload
 

सुप्रीम कोर्ट- ऑफिस में काम के बढ़ते दवाब के चलते आत्महत्या के लिए बॉस नहीं होगा जिम्मेदार

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 June 2018, 16:16 IST

ऑफिस में बढ़ते काम के तनाव के कारण सुसाइड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है. सर्वोच्च अदालत ने कहा कोई कर्मचारी दफ्तर में ज्यादा काम की वजह से परेशान है और वह इस कारण आत्महत्या करता है तो इसके लिए बॉस जिम्मेदार नहीं होगा.

बता दें कि महाराष्ट्र सरकार में औरंगाबाद के डिप्टी डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन किशोर पराशर ने अगस्त 2017 में आत्महत्या कर ली थी. जिसके बाद उनकी पत्नी ने पुलिस में पति से सीनियर ऑफिसर के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज कराया था.

पत्नी ने वरिष्ठ अधिकारी पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उनके पति से छुट्टी के दिन भी काम कराया जाता था. यही नहीं उन्होंने वरिष्ठ अधिकारी पर यह भी आरोप लगाए की उन्होंने उनके पति की एक महीने की सैलरी रोक ली थी और इंक्रीमेंट रोकने की भी धमकी मिली थी.

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के औरंगाबाद बेंच के उस तर्क को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि अगर अधिकारी सीधे तौर पर कर्मचारी को उकसा नहीं रहा है तो भी उसे ऐसी परिस्थितियां पैदा करने का अपराधी माना जाएगा, जिससे असहनीय मानसिक तनाव पैदा हुआ हो.

ये भी पढ़ें-अटलांटिक में उठा तूफ़ान भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें पहुंचा सकता है आसमान पर

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा, " यह सच है कि अगर जानबूझकर आत्महत्या के लिए उकसाने जैसा माहौल बनाया जाए तो आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 के तहत केस चलाया जाना चाहिए. हालांकि, इस केस में मौजूद साक्ष्य अपर्याप्त हैं और ऐसे निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता."

First published: 27 June 2018, 16:16 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी