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SC: CJI ही हैं मास्टर ऑफ रोस्टर, कोलेजियम को केसों का आबंटन देने से होगी कामकाज में दिक्कतें

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 July 2018, 12:48 IST

सुप्रीम कोर्ट ने जजों को केस आवंटित करने की प्रक्रिया में बदलाव की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ही मास्टर ऑफ रोस्टर हैं और इसमें कोई विवाद नहीं है. सीजेआई ही केसों का आबंटन डिसाइड करेंगे. यह याचिका वरिष्ठ वकील और पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण ने दायर की थी. 

शांति भूषण की याचिका पर उनके बेटे प्रशांत भूषण और सीनियर कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल दलील दे रहे थे. जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने शांति भूषण की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि सीजेआई ही 'मास्टर ऑफ रोस्टर' हैं. इसमें कोई संदेह और विवाद नहीं होना चाहिए.

बता दें कि शांति भूषण ने सीजेआई पर मनमाने ढंग से शक्ति का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था और कोर्ट से इस बाबत दिशानिर्देश तय करने की मांग की थी. शांति भूषण ने अपनी याचिका में कहा था कि सुनवाई पीठों के गठन में सीजेआई कोलेजियम से परामर्श किया करें. वहीं इस पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने भूषण की याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि एक व्यक्ति में शक्ति निहित रहना ही ठीक है. कई लोगों में शक्ति होने से अव्यवस्था फैलेगी.

कोर्ट ने पहले के कई फैसलों में यह साफ किया है कि चीफ जस्टिस ही मास्टर ऑफ रोस्टर हैं. यह बात खुद कोर्ट ने कही. कोर्ट ने कहा कि याचिका में रखी गई मांग अव्यवहारिक है और सीजेआई को ही जजों को केस आवंटित करने का अधिकार है. शीर्ष अदालत ने कहा कि केसों के आवंटन में CJI का मतलब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया है ना कि कॉलेजियम.

इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक पीठों का गठन करने और कामकाज का बंटवारा करने सहित पीठों का संयोजन करने के लिए नियम निर्धारित करने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया था. इसके लिए वकील अशोक पांडे ने याचिका दायर की थी.

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पांडे की याचिका खारिज करते हुए सीजेआई दीपक मिश्रा, जस्टिस ए.एम.खानविलकर और जस्टिस डी.वाई.चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा था कि सीजेआई इस संस्था के प्रमुख हैं और न्यायिक एवं प्रशासनिक दोनों मामलों में शीर्ष अदालत के सुचारू ढंग से कामकाज करने के लिए उनके पास प्रशासनिक शक्तियां हैं. जस्टिस चंद्रचूड़ ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि इस संस्था के प्रमुख के तौर पर मुख्य न्यायाधीश पर अविश्वास नहीं जताया जा सकता.

First published: 6 July 2018, 12:46 IST
 
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