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सरकार से मोटी रकम लेने वाले NGO और संगठन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये आदेश

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 September 2019, 9:11 IST

सरकार से मोटी रकम लेने वाले देशभर के सभी एनजीओ और सरकारी संगठनों को अब आरटीई के तहत मांगी गई जानकारी देनी होगी. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा कि, ऐसे एनजीओ आरटीआई कानून के दायरे में आते हैं. शीर्ष कोर्ट ने कहा कि आम लोगों को यह बात जानने का हक है कि उनके पैसे का फिजूल इस्तेमाल तो नहीं किया जा रहा.

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद देशभर के ऐसे तमाम संगठन और एनजीओ को अब आरटीई के तहर मांगी गई जानकारी देनी होगी, जो सरकार से हर साल लाखों रुपये लेते हैं और उनका इस्तेमाल समाज सेवा के लिए खर्च की गई रकम के तौर पर दिखाते हैं.

न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस ने अपने आदेश में कहा कि, हमें ऐसा कोई कारण नहीं दिखता कि देश के नागरिकों को यह पूछने का अधिकार नहीं है कि उसके द्वारा दिए गए पैसों का इस्तेमाल कहां हो रहा है. पीठ ने कहा कि नागरिकों का यह जानने का हक है कि किसी एनजीओ या संगठन को जिन उद्देश्यों के लिए सरकार की ओर से जो फंड दिया जा रहा है, उनका इस्तेमाल उसी उद्देश्य के लिए हो रहा है या नहीं?

न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस की पीठ ने कहा कि वैसे संगठन या एनजीओ जो सरकार से बड़ी राशि बतौर फंड प्राप्त करते हैं, वह सूचना के अधिकार कानून की धारा-2H के तहत %पब्लिक अथॉरिटी’ की श्रेणी में आते हैं. शीर्ष अदालत ने यह आदेश कुछ कॉलेज व संगठनों द्वारा चलाए जाने वाले कॉलेजों द्वारा दायर अपील पर दिया है. शीर्ष अदालत का कहना है कि ऐसा कोई भी संगठन जो सरकार के फंड के तौर पर बड़ी रकम हासिल करता है तो वह पब्लिक अथॉरिटी की श्रेणी में आता है.

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First published: 18 September 2019, 9:11 IST
 
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