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सुप्रीम कोर्ट ने दोषी नेताओं पर आजीवन प्रतिबंध वाली याचिका पर मांगा जवाब

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 September 2016, 11:50 IST
(पत्रिका)

सुप्रीम कोर्ट ने दोषी नेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है. इस याचिका में एक साल के अंदर केसों की सुनवाई करके दोषी पाए जाने वाले नेताओं पर उम्रभर के लिए प्रतिबंध लगाने की मांग की गयी है.

न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और आरएफ नरीमन की पीठ ने बुधवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है. याचिका में चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और अधिकतम आयुसीमा निर्धारित करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है. 

यह याचिका दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की है. दायर याचिका में कहा गया, "आतंकवाद और नक्सलवाद के अलावा हमारे देश की सबसे गंभीर समस्या है व्यापक भ्रष्टाचार और राजनीति का अपराधीकरण".

सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई इस याचिका में कहा गया है कि जब अपराधिक केस में लिप्त होने के बाद नौकरशाह और न्यायिक अधिकारियों को दोबारा दफ्तर खोलने की अनुमति नहीं होती तो फिर ये कानून अपराधी नेताओं पर लागू क्यों नहीं है.

करीब 25 प्रतिशत सांसदों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज 

याचिका में बताया गया है कि 34 प्रतिशत सांसदों के खिलाफ दर्ज किए गए आपराधिक केस विचाराधीन है. इस समस्या के समाधान के लिए कार्यकारिणी कोई कदम नहीं उठा रही. इनमें से करीब 25 प्रतिशत सांसदों पर रेप, मर्डर, हत्या का प्रयास, लूट, डकैती और जबरदस्ती वसूली जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं.

याचिकाकर्ता का कहना है कि जांच प्रणाली की विफलताओं की वजह से संसद और राज्यों की विधानसभा में अपराधियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. 

सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले किसी कर्मचारी के खिलाफ अगर कोई अपराधिक केस दर्ज होते है तो जीवन भर के लिए उसकी सेवाएं रद्द कर दी जाती हैं. वहीं कानून के निर्माताओं पर ये नियम लागू नहीं होता.

याचिका में कहा गया कि गंभीर अपराधों के बाद भी अपराधी नेता अपनी राजनैतिक पार्टी बना रहे हैं. यही नहीं अपराध में लिप्त ये नेता चुनाव लड़ने के लिए भी योग्य समझे जाते हैं. 

इसके अलावा दोषी व्यक्ति दोषसिद्धि की तारीख से छह साल बीतने के बाद चुनाव लड़ने के योग्य हो जाता है और वह विधायिका के सदस्य के साथ-साथ मंत्री बन सकता है.

याचिका में चुनाव आयोग, विधि आयोग और संविधान की समीक्षा के लिए गठित राष्ट्रीय आयोग द्वारा प्रस्तावित चुनाव सुधारों को लागू करने की मांग की गई है.

उपाध्याय ने यह भी कहा है कि राजनीति को अपराधियों से मुक्त करना तब तक असंभव है जब तक कि दोषी लोगों के चुनावी राजनीति में आने पर आजीवन प्रतिबंध नहीं लगा दिया जाता, जैसा दोषी लोगों के साथ कार्यपालिका और न्यायपालिका में किया जाता है.

First published: 15 September 2016, 11:50 IST
 
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