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ओके 'टाटा' बाय-बाय 'सिंगूर': किसानों को मिलेगी जमीन, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया अधिग्रहण

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 August 2016, 15:57 IST
(फाइल फोटो)
QUICK PILL
  • सिंगूर में टाटा नैनो प्रोजेक्ट के लिए हुए जमीन अधिग्रहण को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है.
  • सर्वोच्च अदालत ने अधिग्रहीत 1,000 एकड़ जमीन किसानों को लौटाने का आदेश दिया है.
  • सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए तत्कालीन बुद्धदेब भट्टाचार्य सरकार पर सख्त टिप्पणी की.
  • अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने सत्ता के साथ फ्रॉड (धोखा) किया.
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन किसानों को मुआवजा मिल चुका है, वो वापस नहीं लिया जा सकता.
  • विरोध प्रदर्शन के बाद टाटा मोटर्स ने नैनो प्रोजेक्ट गुजरात के साणंद में ट्रांसफर कर दिया था.

पश्चिम बंगाल के सिंगूर में टाटा नैनो प्रोजेक्ट के लिए हुए जमीन अधिग्रहण को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है. अदालत ने अधिग्रहीत की गई 1,000 एकड़ जमीन किसानों को लौटाने का आदेश दिया है.

जमीन अधिग्रहण रद्द करने के इस आदेश से लेफ्ट को बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन बुद्धदेब भट्टाचार्य सरकार पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार ने सत्ता के साथ फ्रॉड (धोखा) किया.

फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को अब किसानों की ज़मीन लौटाने के लिए 12 हफ्ते का वक्त दिया है. यह अधिग्रहण वर्ष 2006 में वाम सरकार के कार्यकाल के दौरान किया गया था. 

फाइल फोटो

'किसानों की बात तक नहीं सुनी'

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा, "प्राइवेट कंपनी के लिए ज़मीन अधिग्रहण करना जनहित का फैसला नहीं होता और राज्य सरकार ने इस मामले में सही तरीके से नियमों का पालन नहीं किया, इसलिए यह अधिग्रहण पूरी तरह गैरकानूनी है."

अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने उस वक्त विरोध कर रहे किसानों की बात तक नहीं सुनी और उन्हें अधिग्रहण के लिए सही मुआवजा भी नहीं दिया गया. 

'मुआवजा वापस नहीं लिया जाएगा'

अपने फैसले में कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन किसानों को मुआवजा मिल चुका है, उनसे वापस नहीं लिया जा सकता, क्योंकि एक दशक से वे अपनी ज़मीनों से वंचित हैं.

इससे पहले, कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुद्धदेब सरकार के अधिग्रहण के फैसले को सही ठहराया था, जिसके बाद किसानों की ओर से गैर सरकारी संगठनों ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी.

जमीन अधिग्रहण नियम का उल्लंघन

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने लेफ्ट सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा था कि लगता है सरकार ने प्रोजेक्ट के लिए जिस तरह जमीन का अधिग्रहण किया, वह तमाशा और नियम-कानून को ताक पर रखकर जल्दबाजी में लिया गया फैसला था.

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था, "राज्य सरकार ने यह तय कर लिया था कि इसी प्रोजेक्ट को जमीन देनी है और भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 का पूरी तरह पालन नहीं किया गया." 

साणंद में ट्रांसफर हुआ था प्रोजेक्ट

टाटा ने मामले को पांच जजों की संवैधानिक पीठ को भेजे जाने की मांग की थी. विरोध बढ़ता देखकर टाटा ने नैनो प्रोजेक्ट को गुजरात के साणंद में स्थानांतरित कर दिया था. हालांकि टाटा का यह भी कहना था कि सिंगूर की यह जमीन वह किसी और प्रोजेक्ट के लिए अपने पास रखेगी.

सुप्रीम कोर्ट का आज का फैसला आने वाले समय में जमीन अधिग्रहण के मामलों में किसानों की चिंताओं को देखते हुए मील का पत्थर माना जा रहा है.

2006 में ममता बनर्जी ने सिंगूर जमीन अधिग्रहण के मुद्दे पर 26 दिन तक अनशन किया था. (फाइल फोटो)

ममता बनर्जी का आंदोलन

सिंगूर में जमीन अधिग्रहण का मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा रहा है. 2006 में ममता बनर्जी (वर्तमान मुख्यमंत्री) ने 26 दिनों तक अनशन करके राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाया था.

आखिरकार प्रधानमंत्री के दखल देने के बाद ही ममता बनर्जी ने अपना अनशन समाप्त किया था. सिंगूर और नंदीग्राम को पश्चिम बंगाल की राजनीति का टर्निंग प्वाइंट माना जाता है.

कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस बनाने वाली ममता बनर्जी ने तीन दशकों से ज्यादा समय तक बंगाल में सत्तारूढ़ रहने वाली वामपंथी सरकार को सबसे कम सीटों पर सीमित करते हुए 2011 में सत्ता हासिल की थी.

ममता ने इसके लिये सिंगूर में जमीन बेदखली के खिलाफ़ लंबा अनशन किया. सियासी जानकार मानते हैं कि ममता ने सिंगूर और नंदीग्राम मामले के जरिए वामपंथ की जड़ें हिलाने की ओर बड़ा कदम बढ़ाया था.

ममता बनर्जी ने सर्वहारा समाज की बात करने वाले लेफ्ट की जमीन इस भूमि अधिग्रहण के मुद्दे के जरिए हिलाकर रख दी थी. हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार ममता बनर्जी बड़े बहुमत के साथ बंगाल की सत्ता पर काबिज हुई हैं.

First published: 31 August 2016, 15:57 IST
 
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