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सुप्रीम कोर्ट: शहाबुद्दीन को बेल मिलने के बाद क्या बिहार सरकार सो रही थी?

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 February 2017, 8:24 IST
(फाइल फोटो)

बिहार के बाहुबली नेता और आरजेडी के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की जमानत रद्द करने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को जमकर फटकार लगाई.

हालांकि सीवान से पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की जमानत रद्द करने को लेकर अपील पर बुधवार को कोई फैसला नहीं हो सका. अब इस मामले में गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी.  

बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि राज्य सरकार ने शहाबुद्दीन की जमानत को तब चुनौती क्‍यों नहीं दी, जब शहाबुद्दीन को लंबित मामले में जमानत मिली थी?

'बिहार सरकार गंभीर नहीं'

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "राज्‍य सरकार ने पटना हाईकोर्ट में यह क्‍यों नहीं बताया कि शहाबुद्दीन के खिलाफ निचली अदालत में सुनवाई नहीं चल रही है. अगर किसी के खिलाफ कई मामले दर्ज हों, तो इसका मतलब यह नहीं कि एक मामले में जमानत के बाद तब तक उसे चुनौती नहीं दें, जब तक दोषी को सभी मामलों में जमानत नहीं मिल जाती."

अदालत ने तल्ख तेवर में टिप्पणी करते हुए कहा, "जमानत मिलने के बाद राज्‍य सरकार क्‍या सो रही थी जो अब जागी? यह विचित्र स्थि‍ति किसने पैदा की है? बिहार सरकार मामले में गंभीर नजर नहीं आती."

इस बीच शहाबुद्दीन की ओर से वरिष्ठ वकील रामजेठमलानी ने पैरवी नहीं की. जिसके बाद अब मामले को वकील शेखर नाफडे देख रहे हैं. सुनवाई के दौरान वो कोर्टरूम में मौजूद रहे.

इस मामले में पीड़ित चंद्रकेश्वर प्रसाद चंदा बाबू की ओर से वकील प्रशांत भूषण पैरवी कर रहे हैं. अपने तीन बेटों को खोने वाले चंदा बाबू ने सुप्रीम कोर्ट में शहाबुद्दीन की जमानत रद्द करने की याचिका दी है. इस बीच सीवान में चंद्रकेश्वर प्रसाद के घर के पास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है.

सीवान में दहशत का आरोप

पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से सवालिया लहजे में पूछा था कि शहाबुद्दीन मामले में ट्रायल पर रोक क्यों हैं? इसका जवाब देते हुए बिहार सरकार ने बताया था कि शहाबुद्दीन को सीवान से भागलपुर जेल ट्रांसफर किया गया है, इस वजह से ट्रायल में दिक्कतें आईं.

चंदा बाबू ने अपनी याचिका में कहा है कि शहाबुद्दीन के जेल से बाहर निकलने के बाद से सीवान में एक बार फिर दहशत का माहौल है. अपील में कहा गया है कि दो मामलों में शहाबुद्दीन को उम्रकैद की सजा और दूसरे अन्य मामलों में 30 साल की सजा हुई है. ऐसे में इस तरह के अपराधी को जमानत पर आजाद रहने का अधिकार नहीं है.

गौरतलब है कि पटना हाईकोर्ट ने विचाराधीन राजीव रोशन हत्याकांड में शहाबुद्दीन को जमानत दी है. इस फैसले को उनके पिता चंदा बाबू उर्फ चंद्रकेश्वर प्रसाद, उनकी पत्नी कलावती देवी और बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. इसी महीने शहाबुद्दीन की भागलपुर जेल से रिहाई हुई थी.

First published: 28 September 2016, 5:37 IST
 
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