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सुप्रीम कोर्ट ने AADHAAR से PAN को लिंक करने वाले आदेश पर लगाई रोक

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 June 2017, 16:15 IST
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सुप्रीम कोर्ट ने पैन कार्ड से आधार को जोड़ने के सरकार के आदेश पर शुक्रवार को रोक लगा दी. इस मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि इस पर संविधान पीठ के फैसले तक रोक लगी रहेगी. आयकर अधिनियम के प्रावधान के तहत आयकर रिटर्न दाखिल करने और पैन कार्ड बनवाने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य बनाया गया था.

इससे पहले जस्टिस ए के सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने चार मई को याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. इन याचिकाओं में आयकर अधिनियम की धारा 139 एए को चुनौती दी गई थी, जिसे इस साल के बजट और वित्त अधिनियम, 2017 के जरिए लागू किया गया था. 

आयकर अधिनियम की धारा 139 एए के तहत एक जुलाई से आयकर रिटर्न दाखिल करने के दौरान या पैन कार्ड आवंटन के लिए आधार नंबर लिंक करना जरूरी था. सरकार के कदम का विरोध करते हुए भाकपा नेता बिनॉय विश्वम समेत अन्य याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट के समक्ष दावा किया है कि केंद्र सुप्रीम कोर्ट के 2015 के उस आदेश का महत्व नहीं घटा सकता, जिसमें आधार को स्वैच्छिक बताया गया था.

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों के पास पैन कार्ड और आधार कार्ड दोनों हैं, उन्हें अपना आयकर रिटर्न भरते हुए यह बताना होगा. इसके साथ ही जिनके पास आधार कार्ड नहीं है और पैन कार्ड है उनका पैन मान्य माना जाएगा. ऐसे लोग IT रिटर्न भर सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार को आधार कार्ड की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए, जिससे आधार के डाटा लीक ना हो सकें. अदालत ने साथ ही कहा कि सरकार को पैन कार्ड के डुप्लीकेशन को रोकने के लिए भी काम करना चाहिए.

 

केंद्र ने आधार को सुरक्षित बताया

केंद्र सरकार ने आधार कार्ड के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि भारत के नागरिक आधार कार्ड के लिए ज़रूरी शारीरिक सैंपल देने के लिए मना नहीं कर सकते हैं. सरकार ने दलील दी थी कि नागरिक अपने शरीर पर इस मुद्दे पर कोई अधिकार नहीं जता सकते हैं. एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि अपने शरीर पर पूर्ण अधिकार होना एक भ्रम है, ऐसे कई नियम हैं जो इस पर पाबंदी लगाते हैं.

'आधार से 50 हजार करोड़ की बचत'

केंद्र सरकार ने पैन कार्ड के लिये आधार कार्ड को अनिवार्य बनाने के फैसले का बचाव करते हुए सुप्रीम कोर्ट से कहा कि देश में फर्जी पैन कार्ड के इस्तेमाल पर अंकुश के लिए ये कदम उठाया गया है.

अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की बेंच से कहा कि पैन का कार्यक्रम संदेहास्पद होने लगा था, क्योंकि यह फर्जी भी हो सकता था. रोहतगी ने कहा कि आधार पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत व्यवस्था है, जिसके द्वारा एक व्यक्ति की पहचान को फर्जी नहीं बनाया जा सकता था.  

अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि आधार की वजह से गरीबों के लाभ की सरकारी योजनाओं और पेंशन स्कीम्स के लिये 50 हजार करोड़ रुपये से ज़्यादा की बचत हुई है. रोहतगी ने कहा कि करीब दस लाख पैन कार्ड रद्द किये जा चुके हैं. इसके मुकाबले 113.7 करोड़ आधार कार्ड जारी हुए, लेकिन केंद्र सरकार के पास अब तक इसके डुप्लीकेशन का मामला नहीं आया है. 

First published: 9 June 2017, 15:38 IST
 
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