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प्रेमी जोड़ों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट, खिलाफत करने पर खाप पंचायतों को लगाई फटकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 January 2018, 14:27 IST

प्रेम विवाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने खाप पंचायतों पर सख्त रुख अपनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि खाप पंचायत किसी लड़के या लड़की को समन जारी कर शादी करने से नहीं रोक सकती. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अगर कोई बालिग लड़के-लड़की को शादी करने से रोकता है तो यह गैरकानूनी है. अगर, बालिग शादी करते हैं तो कोई सोसाइटी, कोई पंचायत, कोई व्यक्ति उन पर सवाल नहीं उठा सकता.

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने प्रेम विवाह करने वाले युवक-युवतियों पर खाप पंचायतों द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों पर अंकुश लगा पाने में असफल रहने पर केंद्र सरकार को फटकार भी लगायी.

 

न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, 'कोई भी वयस्क महिला या पुरुष अपनी पसंद के किसी व्यक्ति से शादी कर सकता है. खाप पंचायत इस पर सवाल नहीं खड़ा कर सकती.' शीर्ष अदालत ने अंतर-जातीय विवाह करने वाले प्रेमी-युगलों के खिलाफ खाप पंचायतों या ऐसे किसी संगठनों द्वारा किये गये अत्याचार या दुर्व्यवहार को पूरी तरह गैर-कानूनी बताया.

खाप पंचायतों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी देते हुए न्यायालय ने कहा कि यदि केंद्र सरकार खाप पंचायतों को प्रतिबंधित करने की दिशा में कदम नहीं उठाती तो अदालत इसमें दखल देगी. उच्चतम न्यायालय ने कहा कि कोई वयस्क महिला अथवा पुरुष अपनी इच्छा से किसी भी व्यक्ति से शादी कर सकता है और खाप पंचायत इसमें कोई दखल नहीं दे सकती.

वहीं केंद्र की ओर से पेश ASG पिंकी आनंद ने कहा कि केंद्र महिलाओं की गरिमा व सम्मान को को लेकर प्रतिबद्ध है और इस संबंध में कानून लेकर आ रही है. ये बिल फिलहाल लोकसभा में लंबित है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट शक्तिवाहिनी संगठन की याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें ऑनर किंलिंग जैसे मामलों पर रोक लगाने के लिए गाइडलाइन बनाने की मांग की गई है.

First published: 16 January 2018, 14:27 IST
 
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