Home » इंडिया » Supreme court: then work is equal, why should payment is not equal
 

सुप्रीम कोर्ट: समान कार्य के लिए क्यों न मिले सबको समान वेतन?

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 October 2016, 13:44 IST
(एजेंसी)

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी भी कल्याणकारी राज्य में समान काम के लिए समान वेतन मिलना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ के सिद्धांत को सही ठहराते हुए कहा है कि अस्थायी कामगार भी स्थायी की तरह मेहनताना पाने के हकदार हैं.

कोर्ट ने कहा कि अस्थायी और स्थायी कामगारों के बीच वेतन को लेकर भेद करना पूरी तरह से गलत है. पीठ ने कहा कि कामगारों को उसका उचित मेहनताना तो मिलना ही चाहिए.

इस मामले में जस्टिस जेएस खेहड़ और जस्टिस एसए बोबडे की पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ की परिकल्पना संविधान के विभिन्न प्रावधानों को परीक्षण करने के बाद आई है.

पीठ ने कहा कि अगर कोई कर्मचारी दूसरे कर्मचारियों के समान काम या जिम्मेदारी निभाता है तो उसे दूसरे कर्मचारियों से कम मेहनताना नहीं दिया जा सकता. कल्याणी राज्य में तो इस तरह का भेदभाव नहीं किया जा सकता. इस तरह का प्रवृत्ति मनुष्य के सम्मान को ठेस पहुंचाने के समान है.

पीठ के मुताबिक कोई व्यक्ति स्वेच्छा से कम वेतन वेतन पर काम नहीं करता बल्कि उसे ऐसा करने पर मजबूर किया जाता है. कम मजदूरी पर वह सिर्फ इसलिए काम करना चाहता है कि वह अपनी आजीविका चला सके. वह अपने सम्मान और प्रतिष्ठा की तिलांजलि देकर अपने परिवार के रहने-खाने के लिए ऐसा करता है क्योंकि उसे यह मालूम है कि अगर वह ऐसा नहीं करेगा तो उसके आश्रितों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. समान कार्य के लिए समान वेतन न देना उस व्यक्ति का शोषण करना है.

इसके अलावा पीठ ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि भारत ने इंटरनेशनल कंवेंशन ऑन इकोनोमिक, सोशल एंड कल्चरल राइट्स, 1966 पर हस्ताक्षर कर रखा है. जिसमें समान कार्य के लिए समान वेतन देने की बात कही गई है.

पीठ ने कहा कि अस्थायी कर्मचारी अगर स्थायी कर्मचारियों वाला काम करता है या जिम्मेदारी निभाता है, तो फिर ऐसा कोई कारण नहीं बनता कि उसे स्थायी कर्मचारियों के समान वेतन न मिले.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले में बदलाव करते हुए यह टिप्पणी की है. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों को मिलने वाले लाभ देने से इनकार कर दिया था.

First published: 27 October 2016, 13:44 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी