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सुपरटेक पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी- 'बिल्डर जिए या मरे, पैसा तो हम वसूल लेंगे'

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 September 2016, 11:02 IST

सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक बिल्डर्स पर सख्त टिप्पणी की है. निवेशकों के पैसे लौटाने में आनाकानी कर रहे  सुपरटेक को सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि उसे निवेशकों के पैसे लौटाने ही होंगे चाहे वह जिये या मरे, इससे अदालत को कोई मतलब नहीं है.

जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस एके गोयल की डबल बेंच ने मंगलवार को यह कई कड़ी टिप्पणी की. जब कुछ निवेशकों के वकील शोएब आलम ने कहा कि सुपरटेक कहता फिर रहा है कि उसके पास पैसे नहीं है, वह किसी खरीदार को पैसा नहीं देगा. उसने यह यूनीटेक की देखादेखी कहना शुरू किया है. 

'इमारत गिराने पर भी वसूलेंगे पैसा'

इस पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, "आप उन्हें कहने दीजिए, पैसा हम वसूलेंगे. कल अगर इमारत को गिराने का आदेश दिया जाता है तो क्या वह पैसा नहीं देगा. यदि बिल्डर की मौत हो जाए तो भी हम पैसा वसूलेंगे."

बेंच ने आदेश दिया कि सुपरटेक निवेशकों को फ्लैट खरीदने के लिए दी गई राशि का हर महीने 10 फीसदी लौटाए. हालांकि अदालत ने थोड़ी राहत देते हुए बिल्डर द्वारा सुप्रीम कोर्ट में जमा करवाए गए पांच करोड़ रुपयों में से निवेशकों को भुगतान करने से मना कर दिया.

100 निवेशकों ने वापस मांगी रकम

सुप्रीम कोर्ट ने कहा इस पैसे का इस्तेमाल बाद में किया जाएगा. अदालत ने सुपरटेक से कहा कि अगली सुनवाई में वह निवेशकों को लौटाए गई रकम का पूरा ब्योरा एक चार्ट के रूप में कोर्ट में पेश करे.

सुनवाई के दौरान सुपरटेक के वकील राजीव धवन ने दलील दी कि सभी निवेशक पैसा वापस नहीं चाहते. कुल 628 फ्लैट मालिक हैं. इनमें से 100 ने रकम वापस मांगी है, 74 ने अपने पैसे को दूसरे प्रोजेक्ट में निवेश करने का विकल्प लिया है, वहीं 440 निवेशकों ने रहने का फैसला किया है.

एनबीसीसी को इमारतों की जांच का आदेश

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि एनबीसीसी (राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम) की रिपोर्ट आने दीजिए हम देखेंगे कि कानून का पालन किया जाए. एनबीसीसी की ओर से एएसजी पीएस नरसिम्हा ने कोर्ट से कहा कि उसे टावरों की जांच के लिए कुछ समय और चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें चार हफ्ते की मोहलत दी है. इस मामले में अगली सुनवाई 25 अक्तूबर को होगी. कोर्ट ने एनबीसीसी से इमारतों की जांच करने को कहा है और पूछा है कि इमारतों की योजना में क्या खामी है?

40 मंजिला दो टावर गिराने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा में सुपरटेक कंपनी के इमेराल्ड कोर्ट परियोजना में निर्माणाधीन 40 मंजिल के दो टावरों को गिराने का आदेश दिया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 11 अप्रैल 2014 को इन टावरों को गिराने और इनमें मकान खरीदने वालों को उनका धन लौटाने का निर्देश कंपनी को दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश एमेराल्ड कोर्ट ऑनर्स रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका पर सुनाया था. संगठन ने आरोप लगाया था कि इन टावरों के निर्माण की मंजूरी उत्तर प्रदेश अपार्टमेन्ट कानून का उल्लंघन करके दी गई थी. 

नोएडा अथॉरिटी पक्ष में

नोएडा अथॉरिटी ने कहा है कि सुपरटेक को फ्लोर बढ़ाने की इजाजत देने में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन कोर्ट ने पूछा था, जब 24 मंजिलों के लिए निर्माण दिसंबर 2009 में शुरू कर दिया गया था तो उसकी बुनियाद पर 40 मंजिलें कैसे खड़ी कर दी गईं.

अदालत ने कहा, "यह लोगों की जान से खेलने जैसा है, क्योंकि बुनियाद की शक्ति सिर्फ 24 मंजिलों के लिए ही थी. बिल्डर कभी ऐसा नहीं करेगा कि वह 24 मंजिल की इमारत के लिए 40 मंजिल वाली बिल्डिंग की महंगी बुनियाद तैयार करे."

First published: 7 September 2016, 11:02 IST
 
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