Home » इंडिया » Supreme court verdict on Bhima koregaon case: SC refuse to interfear in the matter, 4 weeks house arrest
 

भीमा कोरेगांव मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से किया इंकार, 4 हफ्ते के लिए बढ़ाई पांचों एक्टिविस्ट की नजरबंदी

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 September 2018, 12:13 IST

सुप्रीम कोर्ट ने भीमा कोरेगांव केस में फैसला सुनाते हुए मामले में दखल देने से इंकार कर दिया. भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में 5 मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जांच को आगे बढ़ने के लिए कहा है. फैसला पढ़ते हुए जस्टिस खानविलकर ने कहा कि आरोपी ये तय नहीं कर सकते हैं कि कौन-सी एजेंसी उनकी जांच करे.

गौरतलब है कि इस मामले में पांचों कार्यकर्ता की तुरंत रिहाई और SIT जांच की मांग करते हुए याचिका दायर की गई थी. गौरतलब है कि इस मामले में पांचों कार्यकर्ता वरवरा राव, अरुण फरेरा, वरनॉन गोंजाल्विस, सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा को 29 अगस्त से अपने-अपने घरों में नजरबंद किया गया हैं.

फैसला पढ़ते हुए जस्टिस खानविलकर ने कहा कि आरोपी ये तय नहीं कर सकते हैं कि कौन-सी एजेंसी उनकी जांच करे. तीन में से दो जजों ने इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया है साथ ही उन्होंने SIT का गठन करने से भी मना कर दिया है.

इसी के साथ इस मामले में फैसला सुनाते हुए पीठ ने कहा है कि ये मामला राजनीतिक मतभेद का नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने पांचों कार्यकर्ता की नजरबंदी को 4 हफ्ते के लिए बढ़ा दिया है. हालांकि, इस मामले में जस्टिस चंद्रचूड़ ने CJI दीपक मिश्रा और जस्टिस खानविलकर से अलग राय पेश की थी.

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इस मामले में जस्टिस चंद्रचूड़ की राय थी कि विपक्ष की आवाज को सिर्फ इसलिए नहीं दबाया जा सकता है क्योंकि वो आपसे सहमत नहीं है. इस मामले में उन्होंने SIT बनाने की वकालत की थी.

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने 20 सितंबर को दोनों पक्षों के वकीलों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था.

First published: 28 September 2018, 12:13 IST
 
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