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मॉब लिंचिंग पर SC का निर्देश- संसद में नया कानून बनाए सरकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 July 2018, 11:24 IST

देश भर में भीड़ की हिंसा की खबरें आम बात हो गयी हैं. किसी भी अफवाह पर भीड़ किसी की भी जान ले लेती है. भीड़ की हिंसा पर काबू पाने के लिए आज सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शांति बनाये रखना और समाज की रक्षा करना राज्य की जिम्मेदारी है.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने भीड़ की हिंसा पर ये विचार रखा की संसद को अलग से इस पर कानून बनाना चाहिए. साथ ही राज्य सरकारों को हिदायत देते हुए कहा कि भीड़ की हिंसा को रोकना राज्य का काम है. ये राज्य की जिम्मेदारी है की भीड़ के हिंसक रूप को रोका जा सके. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 20 अगस्त को कोर्ट हालत की दोबारा समीक्षा करेगा.

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गौरतलब है कि देश भर से हिंसक भीड़ द्वारा लोगों की जाने गंवाने की खबरे आ रही है. 2012 से अभी तक केवल गोरक्षा मामले में अब तक 85 घटना हुई है. इंडिया स्पैंड के मुताबिक, इन वारदातों में भीड़ अब तक 33 लोगों की जान ले चुकी है.

गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा से जुडी याचिका पर कोर्ट की पीठ ने सुनवाई की. इस पीठ में जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ शामिल थे. सुप्रीम कोर्ट में सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन एस पूनावाला ने भी याचिका दायर की थी. इसी के साथ महात्मा गांधी के पौत्र तुषार गांधी समेत कई अन्य ने याचिका दाखिल की थी.

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इन मामलों के साथ तुषार गांधी ने मानहानि याचिका दायर करते हुए राज्यों के खिलाफ कोर्ट के पहले के आदेशों का पालन न करने का आरोप लगाया है. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 6 सितंबर को सभी राज्यों को निर्देश दिया था कि गौ-रक्षा के नाम पर हिंसा की रोकथाम के लिये कठोर कदम उठाये जायें. लेकिन ये भीड़ के हिंसक होने के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं. इसी मुद्दे पर तुषार गांधी ने कोर्ट में मानहानि याचिका दायर की है कि राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया.

First published: 17 July 2018, 11:24 IST
 
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