Home » इंडिया » Supreme Court: Whether a sting can be taken as a ground for President rule
 

सुप्रीम कोर्ट: क्या स्टिंग के आधार पर राष्ट्रपति शासन लग सकता है ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 April 2016, 0:21 IST

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन के मामले में चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. अदालत में केंद्र सरकार ने नैनीताल हाईकोर्ट के राष्ट्रपति शासन हटाने के फैसले को चुनौती दी है.

वहीं केंद्र सरकार की तरफ से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी की दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल खड़े किए हैं. कोर्ट ने पूछा कि क्या राष्ट्रपति शासन लगाने का आधार एक स्टिंग हो सकता है ?

STING SC 2

नैनीताल हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल को राज्य से राष्ट्रपति शासन हटाने का फैसला सुनाया था. लेकिन फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने रोक लगाते हुए राष्ट्रपति शासन को बहाल रखा था.

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपक मिश्रा और शिवकीर्ति सिंह की बेंच में मामले की सुनवाई चल रही है.

पढ़ें:उत्तराखंड: विधायकों के 'खरीद-फरोख्त' वाली स्टिंग में दिखे सीएम हरीश रावत

18 मार्च को ही गिरी सरकार !


एजी ने केंद्र सरकार की तरफ से पैरवी करते हुए कहा, "उत्तराखंड विधानसभा में वित्त विधेयक कभी पास नहीं हुआ था,स्पीकर ने अपने रवैए से सदन के अंदर अव्यवस्था फैलाई. हरीश रावत सरकार 18 मार्च को ही गिर चुकी थी."

सुप्रीम कोर्ट ने एजी की दलील पर कहा, "ये मान्यता है कि मनी बिल गिर गया और सरकार को हटना चाहिए. लेकिन अगर स्पीकर ऐसा नहीं कह रहे हैं, तो फिर कौन बताएगा कि वित्त विधेयक पास नहीं हुआ था."

पढ़ें:उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू

दरअसल कांग्रेस के बागी विधायकों ने एक स्टिंग जारी किया था, जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत एक शख्स से कथित रूप से पैसों के लेन-देन पर बात करते दिखे थे. हालांकि रावत ने स्टिंग को सियासी साजिश बताया था.

STING SC

First published: 28 April 2016, 0:21 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी