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मेहुल चौकसी ने PM नरेंद्र मोदी पर की Ph.D, 2010 से लिख रहा था थीसिस

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 March 2019, 16:10 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गुजरात के छात्र मेहुल चोकसी ने पीएचडी हासिल कर ली है. मेहुल चोकसी ने अपनी थीसीस में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री कार्यकालों को शामिल किया है. छात्र का नाम मेहुल चोकसी है, इसलिए ये खबर सुर्खियां बटोर रहा है. बता दें कि पंजाब नेशनल बैंक में करोड़ों रुपए का घोटाला कर देश से भागे भगोड़े का नाम भी मेहुल चोकसी है. भगोड़ा मेहुल चोकसी इस समय देश से भागकर विदेश में रह रहा है.

गुजरात के सूरत का छात्र मेहुल चौकसी ने पॉलिटिकल साइंस से स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की है. मेहुल चौकसी ने वीर नर्मद दक्षिण गुजरात यूनीवर्सिटी से आगे की पढ़ाई की. इस दौरान उन्होंने पीएचडी करने के लिए 'लीडरशिप अंडर गवर्नमेंट केस स्टडी ऑफ नरेंद्र मोदी' विषय का चयन किया.

छात्र चोकसी ने इस बारे में बताया कि अपने पीएचडी रिसर्च में उन्होंने 450 लोगों का इंटरव्यू लिया. इन लोगों में सरकारी अधिकारी, छात्र, राजनेता और किसानों को भी शामिल किया गया. मेहुल चोकसी ने इन लोगों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लीडरशिप क्षमता को लेकर सवाल पूछे थे.

ANI न्यूज एजेंसी को मेहुल चोकसी ने कहा, "प्रश्नोत्तरी में कुल 32 सवाल थे. इन सवालों को 450 लोगों को दिया गया और पाया गया कि 25 प्रतिशत लोगों का मानना है कि मोदी के भाषण सबसे ज्यादा अपील करते हैं. वहीं 48 प्रतिशत लोगों का मानना है कि वह राजनीतिक मार्केटिंग करने में सबसे बेहतर हैं."

बता दें कि मेहुल चोकसी पेशे से एक वकील भी है. उन्होंने 2010 में जब पीएम मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब पीएचडी की शुरुआत की. मेहुल चोकसी ने कला विभाग के निलेश जोशी के मार्गदर्शन में अपनी पीएचडी पूरी की. बताया जा रहा है कि जब मेहुल चोकसी ने शुरुआती चरण में मोदी के नेतृत्व को लेकर लोगों से सवाल करने शुरू किए थे, तो 51 प्रतिशत सकारात्मक और 34.25 प्रतिशत नकारात्मक जवाब मिले. चोकसी ने बताया 46.75 प्रतिशत लोगों का कहना है कि एक नेता को ऐसे निर्णय लेने चाहिए, जिससे कि जनता को फायदा हो.

न्यूज एजेंसी को चोकसी ने कहा, "81 प्रतिशत लोगों का कहना है कि देश के प्रधानमंत्री के लिए सकारात्मक नेतृत्व होना जरूरी है, 31 प्रतिशत का मानना है कि प्रमाणिकता जरूरी है और 34 प्रतिशत लोगों का मानना है कि पारदर्शिता होना आवश्यक है."

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First published: 18 March 2019, 16:10 IST
 
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